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January to March 2026 Article ID: NSS9794 Impact Factor:8.05 Cite Score:52 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9794 View PDf
जैनेंद्र कुमार एवं अज्ञेय की मनोवैज्ञानिक कहानियों की भावगत विशेषताएँ : एक तुलनात्मक अध्ययन
महीपाल दान
सहायक आचार्य (हिन्दी) सेठ मथुरादास बिनानी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नाथद्वारा (जिला राजसमंद) (राज.)
शोध सारांश- हिन्दी कहानी साहित्य के विकास में मनोवैज्ञानिक कहानी-धारा का
अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस धारा ने कहानी को सामाजिक यथार्थ के बाह्य चित्रण
से आगे बढ़ाकर मानव-मन की सूक्ष्म अनुभूतियों, अंतर्द्वंद्वों तथा अवचेतन की
जटिलताओं तक पहुँचाया। प्रेमचंदोत्तर हिन्दी कहानी में जैनेंद्र कुमार एवं अज्ञेय
ऐसे दो प्रमुख कथाकार हैं जिन्होंने मनोवैज्ञानिक दृष्टि को कथा-साहित्य का आधार
बनाया। जैनेंद्र ने व्यक्ति के अंतर्मन, प्रेम, नारी-चेतना तथा आत्मसंघर्ष को कथा
का केंद्र बनाया, जबकि अज्ञेय ने आधुनिक मनुष्य की चेतना, अकेलेपन, अस्तित्व-बोध
एवं आत्मविश्लेषण को अपनी कहानियों का मूल विषय बनाया। प्रस्तुत शोध-पत्र में
दोनों कथाकारों की मनोवैज्ञानिक कहानियों की भावगत विशेषताओं का तुलनात्मक अध्ययन
किया गया है।
शब्द कुंजी-मनोवैज्ञानिक
कहानी, मनोविश्लेषणवाद, व्यक्तिवाद, अस्तित्ववाद, अंतर्द्वंद्व, आत्मविश्लेषण।
