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January to March 2026 Article ID: NSS9795 Impact Factor:8.05 Cite Score:18 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
भ्रमरगीत काव्य एवं सूरदास
डॉ. बिन्दू परस्ते
सहा. प्रा. (हिन्दी) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस श्री अटल बिहारी वाजपेयी, शा. कला एवं वाणिज्य महा., इन्दौर (म.प्र.)
प्रस्तावना- सूरदास हिन्दी के भक्तिकालीन कवियों में एक है। वे कृष्णभक्ति
काव्यधारा के प्रमुख कवि है। सूरदास में काव्य और भक्ति का अद्भुत उत्कर्ष दिखाइै देता
है। सूरसारगर के पदों में मानव मात्र हृदय को भावमग्न कर देने की क्षमता है। वात्सल्य
और वियोग श्रंगार के क्षेत्र में वे अन्यतम कवि है। जन्मान्ध सूरदास वल्लभाचार्य के
षिृष्य थे। भक्ति और श्रंगार के मणिकांचन संयोग को हम सूरदास के काव्य में देख सकते
हैं।
