• April to June 2026 Article ID: NSS9796 Impact Factor:8.05 Cite Score:41 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9796 View PDf

    यमदीप: किन्नरों के संघर्ष की कथा

      निकिता बोहिदार
        अतिथि संकाय, सरकारी महिला महाविद्यालय, संबलपुर (ओडिशा)

शोध सारांश-  ईश्वर ने संसार का सृजन किया। समाज को संचालित करने के लिए उन्होंने दो सुंदर मानवी रूपों का निर्माण भी किया एक है पुरुष और दूसरा है नारी। आदिम काल से ही दोनों का कार्य सामान्यतः एक दूसरे के सहयोग से जीवन व्यतीत करना और बच्चों को जन्म देकर मानव जाति को आगे बढ़ाना समझा जाता है। परंतु मानव समाज में इन दो लिंगों के अलावा एक तीसरा लिंग है जो न ही पूर्ण रूप से पुरुष है और न ही पूर्ण रूप से स्त्री है। समाज में इन्हें हिंजड़ा, किन्नर,बुचरा आदि नाम दिए गए हैं। इनका स्थान समाज में हमेशा ही उपेक्षित रहा है।