• April to June 2026 Article ID: NSS9799 Impact Factor:8.05 Cite Score:26 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    महिला सशक्तिकरण में न्यायपालिका की भूमिका का अध्ययन

      विजय लक्ष्मी जोशी
        सहायक प्राध्यापक, शासकीय विधि महाविद्यालय, शाजापुर (म.प्र.)

शोध सारांश-  एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका का होना लोकतंत्र के विशेष लक्षणों में से एक है। हमारी सरकार के तीन आवश्यक अंग है-कार्यपालिका, न्यायपालिका, एवं विधायिका। हमारी न्यायपालिका  कार्यपालिका एवं विधायिका से पूर्णतः स्वतंत्र है। भारतीय नागरिकों के मूल अधिकारों का जहाॅ कार्यपालिका एवं विधायिका द्वारा अतिक्रमण किया गया है वहाॅ न्यायपालिका ने न्यायिक सक्रियता के माध्यम से कार्यपालिका एवं विधायिका को आवश्यक निर्देश देकर नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा की है। हमारी न्यायपालिका ने देश के शोषित वर्गों विशेषकर महिलाओं को उनके मूल अधिकार दिलाने में, उन्हें शोषण के विरूदध संरक्षण प्रदान करने में उनके सशक्तिकरण में न्यायिक सक्रियता के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिसका प्रस्तुत शोध पत्र में वर्णन किया गया है।

शब्द कुंजी- महिला सशक्तिकरण, न्यायपालिका की भूमिका।