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April to June 2026 Article ID: NSS9817 Impact Factor:8.05 Cite Score:5 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
मरुस्थल क्षेत्र (पाली जिले) में ग्रामीण क्षेत्र में विकास की समस्या- एक भौगोलिक अध्ययन
ओम प्रकाश
सहायक आचार्य (VSY) भूगोल, राजकीय महाविद्यालय,सोजत सीटी पाली (राज.)
शोध सारांश- ग्रामीण क्षेत्र का भौतिक उदय और विकास विश्व के समस्त
भागों में लगभग समान रूप से हुआ है तथापि आधुनिक समय में भी गांव गांव का विकास एक
समान नहीं हुआ है और ना ही पहले हुआ था। ग्रामीण विकास का अभिप्राय है, कि व्यक्ति
विशेष का एक समूह जो गांव में निवास करता है तथा उनके जीवन शैली में परिवर्तन को ग्रामीण
विकास का दर्जा दिया जाता है। ग्रामीण विकास आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक प्रक्रियाओं
में परिवर्तन का महत्वपूर्ण पहलू है। ग्रामीण विकास का आशय है ग्रामीण क्षेत्र का संपूर्ण
विकास ग्रामीण से आशय है गांव में निवास करने
वाले जिनकी जीविका का मूल आधार कृषि है। अर्थात ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत लोगों
के जीवन स्तर में सुधार करना ग्रामीण विकास कहलाता है। ग्रामीण क्षेत्र का विकास देश
के विकास का आधार है। क्योंकि भारत में 68.84 प्रतिशत जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार
ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। वह प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर
है।
ग्रामीण विकास में कृषि विकास के साथ-साथ आधारभूत
सेवाओं के निर्माण के साथ-साथ मानवीय विकास के विभिन्न विविध पहलू को ध्यान में रखना
अत्यंत आवश्यक है बगैर बुनियादी सेवा के निर्माण एवं विकास के संपूर्ण ग्रामीण विकास
कल्पना करना व्यर्थ है। बुनियादी सेवा में रेल, सड़क परिवहन, दूर संचार, ऊर्जा ,शिक्षा,
स्वास्थ्य,ं कृषि विकास आधुनिक सिंचाई सुविधा
सुविधा, स्वच्छ जल आपूर्ति, रोजगार मुखी कार्यक्रम आदि शामिल है। इन बुनियादी आधारभूत
सेवाओं के विकास पर ही ग्रामीण विकास एवं देश का विकास टिका हुआ है। यदि देश के ग्रामीणों
में आधारभूत सुविधाओं का विकास नहीं है तो संपूर्ण ग्राम का विकास संभव है।
शब्द कुंजी-कृषि, पेयजल, ग्रामीण विकास,
पशुपालन, रोजगार, जनसँख्या।
