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October to December 2025 Article ID: NSS9819 Impact Factor:8.05 Cite Score:3 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
दयानन्द सरस्वती का अछूतोद्वार में योगदान
मदन लाल
एम.ए. (इतिहास), सरवरी ब्लॉक कल्याणपुर, बालोतरा (राज.)
प्रस्तावना- महर्षि दयानन्द सरस्वती
भारतीय पुनर्जागरण आंदोलन के पुरोधा में से एक थेस 19 वी सदी में भारतीय समाज में अनेक
सामाजिक, धार्मिक बुराईयों से ग्रस्त था। एक तरफ भारत पर अंग्रेजों ने अधिकार कर रखा
था। वही दूसरी और भारतीय समाज की स्वंय की कमजोरियां लोगों के जीवन बद्द्तर बना रही
थी। इन सामाजिक धार्मिक बुराईयों के विरोध में सबसे पहले मशाल राजा राम मोहन राय ने
जलाई थी। राम मोहन राय पशिचमी सभ्यता संस्कृति से प्रभावित थे। उन्होंने वेदों की प्रमाणिकता
का खण्डन किया। कालांतर में स्वामी दयानन्द सरस्वती पैदा हुआ। दयानन्द सरस्वती ने वेदों
के आधार पर भारतीय समाज में विद्यमान बुराईयों का विरोध किया था। दयानन्द सरस्वती का
जन्म 1824 में गुजरात में हुआ था।उन्होंने वेदों की शिक्षा अपने पिता से प्राप्त की
थी।
