-
April to June 2024 Article ID: NSS9820 Impact Factor:8.05 Cite Score:28 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9820 View PDf
बौद्ध दर्शन : उद्भव, दार्शनिक सिद्धांतों एवं वर्तमान युग में इसकी प्रासंगिकता का अध्ययन
डॉ. वसीम खान
दर्शनशास्त्र विभाग, रविंद्रनाथ टैगोर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कपासन, जिला चित्तौड़गढ़ (राज.)राकेश कुमार जीनगर
इतिहास विभाग, रविंद्रनाथ टैगोर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कपासन, जिला चित्तौड़गढ़ (राज.)
शोध सारांश- बौद्ध धर्म भारतीय
दार्शनिक परंपरा की एक महत्वपूर्ण विचारधारा है, जिसका उद्भव छठी शताब्दी ईसा पूर्व
में महात्मा गौतम बुद्ध के उपदेशों से हुआ। यह दर्शन मानव जीवन में व्याप्त दुःखों,
उनके कारणों तथा उनके निराकरण के उपायों का तर्कसंगत एवं व्यावहारिक विश्लेषण प्रस्तुत
करता है। बौद्ध दर्शन के मूल आधार चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, अनित्य, अनात्मवाद
तथा प्रतीत्यसमुत्पाद जैसे सिद्धांत हैं, जो मानव जीवन को नैतिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक
दिशा प्रदान करते हैं।
प्रस्तुत
शोध-पत्र का उद्देश्य बौद्ध धर्म के उद्भव, विकास, दार्शनिक सिद्धांतों तथा शिक्षा
एवं समाज पर उसके प्रभाव का अध्ययन करना है। अध्ययन में वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक
शोध पद्धति का उपयोग किया गया है तथा द्वितीयक स्रोतों, जैसे पुस्तकों, शोध-पत्रों
एवं प्रामाणिक साहित्य का सहारा लिया गया है। अध्ययन से ज्ञात होता है कि बौद्ध दर्शन
केवल एक धार्मिक विचारधारा नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के सर्वांगीण विकास, सामाजिक
समानता, नैतिकता, करुणा एवं विश्व शांति का मार्ग प्रशस्त करता है।
वर्तमान
समय में बढ़ते तनाव, हिंसा, असहिष्णुता एवं नैतिक मूल्यों के ह्रास की परिस्थितियों
में बौद्ध दर्शन के सिद्धांत विशेष रूप से प्रासंगिक प्रतीत होते हैं। निष्कर्षतः कहा
जा सकता है कि बौद्ध धर्म दर्शन आधुनिक समाज की अनेक समस्याओं के समाधान हेतु एक प्रभावी
एवं मानवतावादी दृष्टिकोण प्रदान करता है।
शब्द कुंजी-बौद्ध धर्म, गौतम बुद्ध,
चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, अनित्य, अनात्मवाद, करुणा, निर्वाण।
