• April to June 2026 Article ID: NSS9824 Impact Factor:8.05 Cite Score:19 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    रामधारी सिंह दिनकर के काव्य में राष्ट्रीय चेतना : एक आलोचनात्मक अध्ययन

      मनोहर दान
        ई-96, सेक्टर 12, सिद्धार्थ नगर, मालवीय नगर, जयपुर (राज.)

शोध सारांश-  आधुनिक हिंदी साहित्य में रामधारी सिंह दिनकर राष्ट्रीय चेतना के सर्वाधिक सशक्त कवियों में परिगणित किए जाते हैं। उन्होंने ऐसे समय में साहित्य सृजन किया जब भारतीय समाज औपनिवेशिक शासन, सांस्कृतिक संक्रमण, सामाजिक विषमता तथा राजनीतिक संघर्षों से गुजर रहा था। दिनकर के काव्य में राष्ट्रीयता केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें सांस्कृतिक अस्मिता, सामाजिक न्याय, मानवीय गरिमा तथा विश्वबंधुत्व की व्यापक भावना समाहित है। प्रस्तुत शोध आलेख में दिनकर के काव्य में निहित राष्ट्रीय चेतना के विविध आयामों का आलोचनात्मक अध्ययन किया गया है। विशेष रूप सेरेणुका, हुंकार, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथीतथापरशुराम की प्रतीक्षाजैसी कृतियों के आधार पर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि दिनकर की राष्ट्रीय चेतना भारतीय समाज के सांस्कृतिक, राजनीतिक तथा नैतिक जीवन को किस प्रकार प्रभावित करती है।

शब्द कुंजी-राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, सामाजिक न्याय, दिनकर, आधुनिक हिंदी कविता, स्वतंत्रता आंदोलन।