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July to September 2025 Article ID: NSS9827 Impact Factor:8.05 Cite Score:4 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
जैनेंद्र एवं अज्ञेय की मनोविश्लेषणवादी कहानियों की शिल्पगत विशेषताओं का तुलनात्मक अध्ययन
महीपाल दान
शोधार्थी, ज्योति विद्यापीठ महिला विश्वविद्यालय जयपुर (राज.)डॉ. राज बाला
शोध निर्देशिका, ज्योति विद्यापीठ महिला विश्वविद्यालय जयपुर (राज.)
शोध सारांश- हिंदी कहानी साहित्य के
विकास में मनोविश्लेषणवादी प्रवृत्ति ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस
प्रवृत्ति ने कहानी को बाह्य घटनाओं, सामाजिक यथार्थ और आदर्शवादी दृष्टिकोण से
हटाकर मानव-मन की जटिलताओं, अंतर्द्वंद्वों, कुंठाओं, दमित इच्छाओं और अचेतन मन की
गतिविधियों की ओर उन्मुख किया। जैनेंद्र कुमार एवं अज्ञेय हिंदी के ऐसे दो प्रमुख
कथाकार हैं जिन्होंने मनुष्य के आंतरिक जीवन को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया।
प्रस्तुत शोध-पत्र में दोनों कहानीकारों की मनोविश्लेषणवादी कहानियों की शिल्पगत
विशेषताओं का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है।
शब्द कुंजी- मनोविश्लेषणवाद,
जैनेंद्र, अज्ञेय, कथाशिल्प, पात्र-योजना, भाषा-शैली।
