• January to March 2026 Article ID: NSS9842 Impact Factor:8.05 Cite Score:5 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    सतत विकास में भारतीय ज्ञान परंपरा का वर्तमान परिदृश्य

      डॉ. मोहन निमोले
        सहायक प्राध्यापक (भूगोल) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस,शासकीय माधव महाविद्यालय, उज्जैन (म.प्र.)

प्रस्तावना :भारतीय ज्ञान परंपरा केवल हमारे इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि आज के समय में पर्यावरण को बचाने और सतत विकास को हासिल करने का एक बहुत बड़ा जरिया बन चुकी है।

    ​प्राचीन भारतीय दर्शन हमेशा से यह मानता आया है कि मनुष्य और प्रकृति अलग नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे पर निर्भर हैं। आइए देखते हैं कि आज के वर्तमान परिदृश्य में यह परंपरा कैसे काम आ रही है।वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण, जल संकट और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन जैसी चुनौतियों के कारण सतत विकास की आवश्यकता बढ़ गई है। ऐसे में भारतीय ज्ञान परंपरा के सिद्धांत—प्रकृति के प्रति सम्मान, संसाधनों का संतुलित उपयोग और सह-अस्तित्व की भावना—अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।