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July to September 2025 Article ID: NSS9848 Impact Factor:8.05 Cite Score:5 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
भारतीय ज्ञान परम्परा के आलोक में भारतीय इतिहासलेखन : स्रोत, पद्धति एवं समकालीन पुनर्पाठ—एक समीक्षात्मक अध्ययन
डॉ. मधुसूदन चौबे
एसोसिएट प्रोफेसर (इतिहास) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस, शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बडवानी (म.प्र.)
शोध सारांश-
भारतीय ज्ञान परम्परा विश्व की
सर्वाधिक प्राचीन एवं निरन्तर विकसित ज्ञान-परम्पराओं में से एक है। इस परम्परा ने
केवल दर्शन, धर्म
और अध्यात्म को ही नहीं, बल्कि
शिक्षा, चिकित्सा, गणित,
खगोल,
राज्यशास्त्र,
कृषि तथा इतिहास जैसे विविध
ज्ञान-विषयों को भी समृद्ध किया है। भारतीय इतिहासलेखन का विकास भी इसी व्यापक
ज्ञान-परम्परा की बौद्धिक पृष्ठभूमि में हुआ,
जहाँ इतिहास को मात्र राजनैतिक घटनाओं
के कालक्रम के रूप में न देखकर समाज की सामूहिक स्मृति,
सांस्कृतिक निरन्तरता और नैतिक चेतना
के रूप में समझा गया। औपनिवेशिक काल में भारतीय इतिहासबोध पर अनेक प्रश्न उठाए गए
और यह स्थापित करने का प्रयास किया गया कि भारत में वैज्ञानिक इतिहासलेखन का अभाव
था। किन्तु वैदिक साहित्य, इतिहास–पुराण, बौद्ध एवं जैन ग्रन्थ, अभिलेख,
ताम्रपत्र,
मुद्राएँ,
पुरातात्त्विक अवशेष तथा विदेशी
यात्रियों के विवरण इस धारणा का सम्यक् परीक्षण करने की आवश्यकता को रेखांकित करते
हैं।
प्रस्तुत
शोध-पत्र भारतीय ज्ञान परम्परा के आलोक में भारतीय इतिहासलेखन के स्रोतों, पद्धतियों तथा समकालीन पुनर्पाठ का
विश्लेषण करता है। अध्ययन का उद्देश्य भारतीय इतिहासलेखन की स्वदेशी अवधारणा, उसके स्रोत-वैविध्य तथा आधुनिक
इतिहास-विमर्श में उसकी प्रासंगिकता का आलोचनात्मक मूल्यांकन करना है। शोध में
गुणात्मक एवं ऐतिहासिक अनुसंधान पद्धति का उपयोग किया गया है तथा साहित्यिक, अभिलेखीय और पुरातात्त्विक स्रोतों का
तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि भारतीय इतिहासलेखन को न
तो केवल औपनिवेशिक प्रतिमानों के आधार पर समझा जा सकता है और न ही बिना
स्रोत-समालोचना के परम्परागत आख्यानों के आधार पर। भारतीय ज्ञान परम्परा का
समकालीन पुनर्पाठ तभी सार्थक होगा जब वह प्रमाण-आधारित,
बहुस्रोत-आधारित और आलोचनात्मक
दृष्टिकोण पर आधारित हो।
शब्द कुंजी-भारतीय ज्ञान परम्परा, इतिहासलेखन, इतिहास, स्रोत, भारतीय ज्ञान प्रणाली, भारतीय इतिहास-दृष्टि।
