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April to June 2026 Article ID: NSS9849 Impact Factor:8.05 Cite Score:6 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
ग्रामीण भारत में पलायन और उसके सामाजिक परिणाम : एक समाजशास्त्रीय अध्ययन
पंकज कुमार मीणा
सहायक आचार्य (समाजशास्त्र) समाजशास्त्र, एमएलवी, राजकीय महाविद्यालय, भीलवाड़ा (राज.)
सारांश:
भारत को प्रायः गाँवों का देश कहा
जाता है, क्योंकि
देश की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। ग्रामीण समाज
भारतीय सामाजिक संरचना की आधारशिला रहा है। किन्तु आर्थिक,
सामाजिक,
शैक्षणिक तथा पर्यावरणीय कारणों से
ग्रामीण जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग निरंतर ग्रामीण क्षेत्रों से नगरों तथा अन्य
राज्यों की ओर पलायन कर रहा है। पलायन की यह प्रक्रिया केवल जनसंख्या के स्थान
परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि
यह सामाजिक संरचना, पारिवारिक
व्यवस्था, आर्थिक
गतिविधियों, सांस्कृतिक
मूल्यों तथा सामुदायिक जीवन को भी प्रभावित करती है। ग्रामीण भारत में बढ़ते पलायन
ने एक ओर लोगों को रोजगार, शिक्षा
तथा बेहतर जीवन स्तर के अवसर उपलब्ध कराए हैं,
वहीं दूसरी ओर पारिवारिक विघटन, कृषि संकट,
महिलाओं पर बढ़ते दायित्व, बच्चों के समाजीकरण में परिवर्तन तथा
सामाजिक असंतुलन जैसी समस्याओं को भी जन्म दिया है। प्रस्तुत शोध लेख में ग्रामीण
भारत में पलायन की प्रवृत्ति, उसके
कारणों तथा सामाजिक परिणामों का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विश्लेषण किया गया है।
कुंजी शब्द :पलायन, ग्रामीण समाज, सामाजिक परिवर्तन, नगरीकरण, कृषि संकट, परिवार, प्रवासी श्रमिक।
