• April to June 2026 Article ID: NSS9850 Impact Factor:8.05 Cite Score:5 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    डिजिटल भारत और ग्रामीण समाज में सामाजिक परिवर्तन : एक समाजशास्त्रीय अध्ययन

      रविन्द्र सिंह राव
        सहायक आचार्य (समाजशास्त्र) एमएलवी, राजकीय महाविद्यालय, भीलवाड़ा (राज.)

सारांश: भारत एक ग्रामप्रधान देश है जहाँ आज भी लगभग दो-तिहाई जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। ग्रामीण समाज भारतीय सामाजिक संरचना की आधारभूत इकाई रहा है। परंपरागत रूप से ग्रामीण जीवन कृषि, जाति व्यवस्था, सामुदायिक संबंधों तथा सीमित संसाधनों पर आधारित रहा है। किन्तु इक्कीसवीं सदी में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास ने ग्रामीण जीवन के विविध आयामों को प्रभावित किया है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015 में प्रारम्भ किए गए डिजिटल भारत कार्यक्रम ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिंग तथा संचार व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन उत्पन्न किए हैं। डिजिटल तकनीकों के प्रसार से ग्रामीण समुदायों की सूचनाओं तक पहुँच बढ़ी है, आर्थिक गतिविधियों में विविधता आई है तथा सामाजिक चेतना के स्तर में वृद्धि हुई है। इसके साथ ही डिजिटल असमानता, तकनीकी अशिक्षा तथा साइबर सुरक्षा जैसी चुनौतियाँ भी उभरकर सामने आई हैं। प्रस्तुत शोध लेख में डिजिटल भारत कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण समाज में हुए सामाजिक परिवर्तनों का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विश्लेषण किया गया है।

कुंजी शब्द:डिजिटल भारत, ग्रामीण समाज, सामाजिक परिवर्तन, ई-गवर्नेंस, डिजिटल साक्षरता, सूचना प्रौद्योगिकी।