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October to December 2025 Article ID: NSS9851 Impact Factor:8.05 Cite Score:5 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
भारतीय ज्ञान परंपरा के परिप्रेक्ष्य में द्वादश ज्योतिर्लिंग और भारतीय सांस्कृतिक एकता : एक ऐतिहासिक अध्ययन
डॉ. मधुसूदन चौबे
एसोसिएट प्रोफेसर (इतिहास) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस, शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बडवानी (म.प्र.)
शोध सारांश- भारतीय
ज्ञान परम्परा विश्व की प्राचीनतम एवं समृद्ध ज्ञान-परम्पराओं में से एक है, जिसमें धर्म,
दर्शन,
संस्कृति,
शिक्षा,
कला,
साहित्य तथा सामाजिक जीवन का समन्वित
स्वरूप परिलक्षित होता है। इस परम्परा में तीर्थ केवल धार्मिक आस्था के केन्द्र
नहीं हैं, बल्कि
सांस्कृतिक निरन्तरता, सामाजिक
समरसता तथा राष्ट्रीय एकात्मता के सशक्त माध्यम भी हैं। द्वादश ज्योतिर्लिंग
भारतीय शैव परम्परा के सर्वाधिक प्रतिष्ठित तीर्थ हैं,
जिनका उल्लेखशिवपुराण, लिङ्गपुराण, स्कन्दपुराणसहित अनेक संस्कृत ग्रन्थों में मिलता है। भारत के विभिन्न भौगोलिक
क्षेत्रों में स्थित ये ज्योतिर्लिंग भारतीय सांस्कृतिक भूगोल का ऐसा सशक्त
नेटवर्क निर्मित करते हैं, जिसने
प्राचीन काल से ही विविध भाषायी, सांस्कृतिक
एवं सामाजिक समुदायों को एक साझा सभ्यतागत चेतना से जोड़ा है।
प्रस्तुत
शोध-पत्र का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परम्परा के परिप्रेक्ष्य में द्वादश
ज्योतिर्लिंगों के ऐतिहासिक विकास, सांस्कृतिक महत्त्व तथा भारतीय सांस्कृतिक एकता के निर्माण में
उनकी भूमिका का विश्लेषण करना है। अध्ययन गुणात्मक एवं ऐतिहासिक अनुसंधान पद्धति
पर आधारित है तथा इसमें पुराण, उपनिषद, अभिलेखीय साक्ष्य, पुरातात्त्विक अध्ययन, इतिहासलेखन तथा आधुनिक शोध-साहित्य का
समन्वित उपयोग किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि द्वादश ज्योतिर्लिंग केवल
धार्मिक संस्थाएँ नहीं हैं, बल्कि
भारतीय सांस्कृतिक भूगोल, तीर्थ-परम्परा, स्थापत्य-कला,
लोकजीवन,
व्यापारिक सम्पर्क तथा सांस्कृतिक
संवाद के महत्त्वपूर्ण केन्द्र रहे हैं। वर्तमान समय में भी ये तीर्थ सांस्कृतिक
विरासत, धार्मिक
पर्यटन तथा राष्ट्रीय एकात्मता के सुदृढ़ आधार के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका
निभा रहे हैं। अतः द्वादश ज्योतिर्लिंगों का अध्ययन भारतीय इतिहास, भारतीय ज्ञान परम्परा तथा सांस्कृतिक
अध्ययन के अंतर्विषयक परिप्रेक्ष्य में अत्यन्त प्रासंगिक है।
शब्दकुंजी- भारतीय ज्ञान परम्परा, द्वादश ज्योतिर्लिंग, सांस्कृतिक एकता, शैव परम्परा, तीर्थ-परम्परा, भारतीय इतिहास, सांस्कृतिक भूगोल।
