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January to March 2026 Article ID: NSS9856 Impact Factor:8.05 Cite Score:6 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
पुष्टिमार्गीय शुद्धाद्वैत दर्शन में भक्ति परम्परा
तुषार श्रीमाली
शोधार्थी (इतिहास) भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)
प्रस्तावना- पुष्टि मार्ग शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है जिसमें
पुष्टि का अर्थ-संपूर्ण पोषण, समृद्धि एवं जिसमें कोई कमी न हो। मार्ग का अर्थ -रास्ता,
पथ अर्थात् ऐसा मार्ग जो व्यक्ति या जीव को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, आध्यात्मिक रूपों
में पुष्ट करता है या उसमें संपूर्णता प्रदान करता है। पुष्टिमार्ग को मुख्यतः प्रभु
श्रीनाथजी से संबंधित मंदिरों व पीठों से संबंधित है। पुष्टिमार्ग के संस्थापक वल्लभाचार्य
जी थे इस कारण पुष्टिमार्ग को वल्लभ सम्प्रदाय कहा जाता है। विरासत के रूप में विट्ठलनाथ
जी द्वारा इसे आगे बढ़ाया गया।
