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April to June 2026 Article ID: NSS9857 Impact Factor:8.05 Cite Score:30 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
शहीद करतार सिंह सराभा: गदर आंदोलन के महानायक और भगत सिंह के वैचारिक गुरु
डॉ. अमित कुमार ताम्रकार
सहायक प्राध्यापक (इतिहास) PMCoE स्वामी विवेकानंद शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नरसिंहपुर (म.प्र.)
शोध सारांश-यह
शोध पत्र बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक दशक में भारत और विदेशों (विशेषकर उत्तरी अमेरिका)
में पनपे क्रांतिकारी राष्ट्रवाद के संदर्भ में शहीद करतार सिंह सराभा के जीवन और
उनके युगांतरकारी योगदान का मूल्यांकन करता है।बीसवीं सदी के आरंभिक दशक में
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम ने एक नई करवट ली, जहाँ सशस्त्र
क्रांति के माध्यम से ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया गया। इस
क्रांतिकारी चेतना को वैश्विक धरातल पर संगठित करने का श्रेय 'गदर आंदोलन' को
जाता है। इस आंदोलन के सबसे जाज्वल्यमान नक्षत्र करतार सिंह सराभा थे। सराभा ने न
केवल 'गदर' पत्रिका
के माध्यम से औपनिवेशिक सत्ता के क्रूर स्वरूप को उजागर किया, बल्कि
प्रथम विश्व युद्ध की परिस्थितियों का लाभ उठाकर भारत में एक व्यापक सैन्य विद्रोह
(1915 ई.) की रूपरेखा तैयार की। इस पत्र में उनके प्रारंभिक जीवन, वैचारिक
रूपांतरण,
संगठनात्मक कौशल,
लाहौर षड्यंत्र केस और उनकी शहादत के दूरगामी राजनैतिक व सामाजिक
प्रभावों—जैसे भगत सिंह की क्रांतिकारी चेतना के निर्माणका ऐतिहासिक विश्लेषण किया
गया है। 24 मई 1896 को लुधियाना के सराभा गाँव में जन्मे इस युवा ने मात्र 19 वर्ष
की आयु में 16 नवंबर 1915 को लाहौर सेंट्रल जेल में हंसते-हंसते फांसी के फंदे को
चूम लिया। खुदीराम बोस के बाद वे भारत के सबसे कम उम्र के शहीदों में से एक हैं।
उनका जीवन-वृत्त लघु अवश्य था,
परंतु उसका ऐतिहासिक प्रभाव अत्यंत व्यापक और दूरगामी रहा।
शब्द कुंजी-करतार सिंह सराभा, गदर आंदोलन, गदर पत्रिका, क्रांतिकारी राष्ट्रवाद, लाहौर षड्यंत्र केस, निर्भीक राष्ट्रवाद।
