• April to June 2026 Article ID: NSS9859 Impact Factor:8.05 Cite Score:51 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9859 View PDf

    सवरा (सौरा) जनजाति में विजय दिवस : एक समाजशास्त्रीय विश्लेषण छत्तीसगढ़ राज्य के विशेष सन्दर्भ में

      छन्नू कुमार मेरावी
        शोधार्थी,समाजशास्त्र एवं समाजकार्य अध्ययनशाला, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छ.ग.)
      डॉ. हेमलता बोरकर वासनिक
        शोध निर्देशक,प्राध्यापक, समाजशास्त्र एवं समाजकार्य अध्ययनशाला, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छ.ग.)

शोध सारांश-  सवरा जनजाति छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियो मे से एक है |छत्तीसगढ़ के संदर्भ में सवरा जनजाति विशेष रूप से कबीरधाम,महासमुंद बिलासपुर,लोरमी,बेमेतरा,सारंगढ़ बिलाईगढ़, जांजगीरचाम्पा, सक्ती, रायगढ़, जशपुरसरगुजा, धमतरी, जगदलपुर, गरियाबंद, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, दुर्ग,रायपुर, बलौदाबाजार, राजनांदगाव आदि जिलों में निवास करती है।

सवरा जनजाति शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रो मे निवासरत हैं | आज सवरा समाज जिस आरक्षण का लाभ ले रहे हैं उसकी मुख्य आधार “रास्ता रोको जन आन्दोलन “ है,यह आन्दोलन सवरा जनजाति को आरक्षण से वंचित करने के कारण हुआ था | प्रारंभ मे सवरा समाज की पुराने रिकार्ड जैसे मिशल बंदोबस्त और दाखिल ख़ारिज पंजी मे सौंरा,सौरा,संवरा,सवारा और सउरीन  आदि लिखा गया था | इस तरह राजपत्र एवं वर्ष 1950 पूर्व अभिलेखों मे अक्षर समानता न होने के कारण शासन के संवैधानिक अधिकार से वंचित कर दिए गए जिसके कारण सवरा समाज ने 1 नवम्बर 2017 को अपने संवैधानिक अधिकार पाने के लिए रास्ता रोको जन आन्दोलन किये जिसके परिणाम स्वरुप  वर्ष 2002-03 छत्तीसगढ़ राजपत्र मे अनुसूचित जनजाति वर्ग के कुल 43 जनजाति को मान्यता दिया गया जिसमे क्रमांक 41 मे सवर,सवरा अंकित था | उसी दिन से सवरा समाज द्वारा 1 नवम्बर को प्रतिवर्ष विजय दिवस के रूप मे मनाया जाता हैं | यह विजय दिवस समाज को अपने संवैधानिक अधिकार के प्रति जागरूकता का याद दिलाता हैं |

शब्द कुंजी –सवरा जनजाति,विजय दिवस,,रास्ता रोको जन आन्दोलन, समाजशास्त्रीय विश्लेषण, छ.ग. |