• April to June 2026 Article ID: NSS9861 Impact Factor:8.05 Cite Score:22 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    जैसा खाए अन्न वैसा हो मन व्यक्तिगत पोषण की शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य में भूमिका

      डॉ. कपिला बाला पांचाल
        सहायक प्राध्यापक (मनोविज्ञान) श्री अटल बिहारी वाजपेयी शा. कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, इन्दौर (म.प्र.)

प्रस्तावना-भारतीय भोजन परम्परा का बहुत रूचिकर इतिहास रहा है। प्रत्येक साम्राज्य के समूह में रसोईयों द्वारा संचालित एक शाही दरबार था जिनमें कई प्रकार के व्यंजनों में नवचार किए जाते थे :सिंधु घाटी के लोग दालें और अनाज खाते थे। मांसाहारी भोजन को पकाने में ग्रिलिंग को प्राथमिकता दी जाती थी! जैसे आधुनिक युग में टिक्का। खाद्य संस्कृति में चार पैटर्न थे- प्रागैतिहासिक, वैदिक, मुगल और यूरोपीय । पनीर भारत में पुर्तगालियों द्वारा लाया गया था।जैसा खाए अन्न वैसा हो मन जैसा पिए पानी वैसी हो बानी।