• January to March 2026 Article ID: NSS9862 Impact Factor:8.05 Cite Score:26 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    बुद्ध की शिक्षाएं एवं व्य क्तित्व निर्माण

      डॉ. कपिला बाला पांचाल
        सहायक प्राध्यापक (मनोविज्ञान) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस श्री अटल बिहारी वाजपेयी शा. कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, इन्दौर (म.प्र.)

प्रस्तावना-व्‍यक्तित्‍व व्‍यवहारिक, संज्ञानात्‍मक और भावनात्‍मक प्रतिमानों का वर्णन करता है जो किसी व्‍यक्ति‍ के जीवन के प्रति अद्वितीय समायोजन का निर्माण करते है। व्‍यक्तित्‍व अपेक्षाकृत स्थिर होता है लेकिन अनुभवों और विकासात्‍मक प्रक्रियाओं के कारण समय के साथ बदल सकता है। व्‍यक्तित्‍व के अधिकांश सिंद्धांत लक्षणों प्रेरणा, कौशल और पहचान पर ध्‍यान केन्द्रित करते है। व्‍यक्तित्‍व विशेषताएं कई जीवन परिणामों से संबंधित है, जैसे काम और रिश्‍ते की सफलता, मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य, कल्‍याण और दीर्घायु व्‍यक्तित्‍व की आधुनिक अवधारणों जैसे स्‍वभाव का सुझाव दिया है जो खतरे और पुरस्‍कार के प्रति बुनियादी और स्‍वचलित प्रतिक्रियाओं को दर्शाते हैं जो सहचर्य अधिगम पर निर्भर करते हैं। ये चार स्‍वभाव हानि से बचाव, पुरस्‍कार पर निर्भरता नवीनता की चाह और दृढता कुछ हद तक उदासीन, आशावादी, क्रोधी आदि व्‍यक्तित्‍व प्रकारों की प्राचीन अवधारणाओं केअनुरूप है । हालांकि ये स्‍वभाव दूसरी श्रेणियों के बजाय व्‍यक्तित्‍व के विभिन्‍न आयामों को दर्शातें है।