• April to June 2026 Article ID: NSS9868 Impact Factor:8.05 Cite Score:21 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9868 View PDf

    पंचायती राज व्यवस्था में नागरिक सहभागिता की चुनौतियाँ: सामाजिक एवं आर्थिक आयामों का अध्ययन

      डॉ. प्रदीप कुमार
        सहायक आचार्य (समाजशास्त्र) डॉ. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, महू, इंदौर (म.प्र.)
      डॉ. अरविन्द सिरोही
        सहायक आचार्य (समाजशास्त्र) चैधरी चरण सिंह विश्वविधालय, मेरठ (उ.प्र.)

शोध सारांश-  पंचायती राज व्यवस्था भारत में लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण की एक महत्वपूर्ण संस्था है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण जनता को स्थानीय शासन एवं विकास प्रक्रिया में सक्रिय रूप से सहभागी बनाना है। प्रस्तुत अध्ययन का मुख्य उद्देश्य उत्तरदाताओं की सामाजिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि का विश्लेषण करना तथा पंचायत में प्रवेश एवं सहभागिता के दौरान उनके समक्ष आने वाली बाधाओं एवं चुनौतियों का अध्ययन करना है। अध्ययन मेरठ जनपद में किया गया, जहाँ से कुल 200 उत्तरदाताओं का चयन किया गया, जिनमें 96 महिलाएँ तथा 104 पुरुष सम्मिलित थे। अध्ययन में अन्वेषणात्मक एवं वर्णनात्मक शोध प्रारूप का उपयोग किया गया तथा प्राथमिक आँकड़ों के संकलन हेतु साक्षात्कार अनुसूची एवं अवलोकन प्रविधि का प्रयोग किया गया।

अध्ययन के निष्कर्षों से ज्ञात हुआ कि उत्तरदाताओं की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति पंचायत गतिविधियों में उनकी सहभागिता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती है। उच्च शिक्षा, बेहतर आर्थिक स्थिति तथा सामाजिक प्रतिष्ठा वाले उत्तरदाता पंचायत कार्यों में अधिक सक्रिय पाए गए। इसके विपरीत निम्न आय वर्ग, कम शिक्षित तथा सामाजिक रूप से वंचित समूहों की सहभागिता अपेक्षाकृत कम रही। अध्ययन से यह भी स्पष्ट हुआ कि पंचायत में प्रवेश एवं प्रभावी सहभागिता के मार्ग में आर्थिक संसाधनों की कमी, चुनावी व्यय, राजनीतिक अनुभव का अभाव, प्रशासनिक जानकारी की कमी, सामाजिक पूर्वाग्रह, जातिगत भेदभाव तथा स्थानीय प्रभावशाली समूहों का दबाव प्रमुख बाधाओं के रूप में विद्यमान हैं। महिला उत्तरदाताओं को विशेष रूप से पारिवारिक प्रतिबंधों, लैंगिक असमानता तथा सीमित राजनीतिक अवसरों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

अध्ययन निष्कर्षतः यह दर्शाता है कि पंचायतों में प्रभावी एवं समावेशी सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक जागरूकता, नेतृत्व विकास, आर्थिक सशक्तिकरण तथा सामाजिक समानता को बढ़ावा देना आवश्यक है। पंचायतों में सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी स्थानीय लोकतंत्र को अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी एवं विकासोन्मुख बनाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।

शब्द कुंजी-पंचायती राज, लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण, पंचायत सहभागिता, सामाजिक पृष्ठभूमि, आर्थिक पृष्ठभूमि, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास, स्थानीय शासन, राजनीतिक सहभागिता, सामाजिक बाधाएँ।