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October to December 2025 Article ID: NSS9871 Impact Factor:8.05 Cite Score:25 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
जलवायु परिवर्तन का जैव विविधता पर प्रभाव एवं संरक्षण
डॉ. रानी वास्केल
सहायक प्राध्यापक (भूगोल) पी.एम.सी.ओ.ई. श्री अटल बिहारी वाजपेयी शा. कला एवं वाणिज्य महाविद्यिालय, इन्दौर (म.प्र.)
शोध सारांश- प्रस्तुत शोध पत्र में जलवायु
परिवर्तन का जैव विविधता पर प्रभाव एवं संरक्षण का भौगोलिक अध्ययन किया गया है। ब्रह्मांड
में पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है, जहाँ मानव जीवन समस्त जीवों का अस्तित्व संभव है।
पृथ्वी पर तापमान, आॅक्सीजन, जल, वायुमंडल विभिन्न प्राकृतिक तत्वों का समावेश है जिसके
फलस्वरूप विभिन्न जीवों जैसे पौधे, पादप, पशु, बैक्टीरिया व मानव सभी का जीवन विकसित
हुआ है। पारिस्थितिक तंत्र द्वारा एक-दूसरे से संबंधित है एवं प्रभावित करते हैं। धरातल
पर समस्त जीवांे-जगत में विभिन्नता पायी जाती है। यह जैव विविधता स्थानीय स्तर से वैश्विक
स्तर पर परिलक्षित होती है।
धरातल पर जीव-जगत में सर्वाधिक विकास बुद्धिमान एवं विकास
करने वाला जीव-मानव है। मानव में विकास की दौड़ में चलते विनाश की राह पर खड़ा हो गया
है। मानव में वनों की कटाई, औद्योगिकीकरण जैसे विभिन्न कारणों से पृथ्वी के वैश्विक
तापमान में वृद्धि की है, जिससे जलवायु में परिवर्तन हो रहा है फलस्वरूप समस्त जैव
जगत का जीवन संकट की स्थिति में पहुँच गया है। एकमात्र मानव ही ऐसा प्राणी है जो समय
रहते हुए इसका संरक्षण व उपाय कर सकता है। समस्त जैव जगत को बचा सकता है।
शब्द कुंजी- हाॅटस्पाट,
पादप, जलवायु, परितंत्र, आवास।
