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April to June 2025 Article ID: NSS9872 Impact Factor:8.05 Cite Score:27 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
चिकित्सा प्रणाली के विकास में भारतीय ज्ञान परम्परा का योगदान
डॉ. मधुसूदन चौबे
एसोसिएट प्रोफेसर (इतिहास) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस, शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बडवानी (म.प्र.)
शोध सारांश- भारतीय ज्ञान परम्परा विश्व की प्राचीनतम एवं सर्वाधिक समृद्ध
ज्ञान परम्पराओं में से एक है, जिसने
दर्शन, गणित, ज्योतिष,
कृषि,
वास्तु,
शिक्षा तथा चिकित्सा जैसे अनेक
क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में भारत
की आयुर्वेद परम्परा मानव जीवन को केवल रोगमुक्त करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने स्वस्थ जीवन, दीर्घायु तथा शारीरिक, मानसिक,
सामाजिक और आध्यात्मिक संतुलन पर
आधारित समग्र स्वास्थ्य (Holistic Health) की अवधारणा प्रस्तुत की। वैदिक साहित्य, विशेषकर अथर्ववेद में औषधीय
वनस्पतियों, रोगों
एवं उपचार विधियों का प्रारम्भिक स्वरूप मिलता है,
जबकि चरक संहिता, सुश्रुत संहिता तथा अष्टाङ्गहृदयम्
जैसे ग्रंथों ने चिकित्सा विज्ञान को व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया।
प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य
चिकित्सा प्रणाली के विकास में भारतीय ज्ञान परम्परा के योगदान का ऐतिहासिक एवं
विश्लेषणात्मक अध्ययन करना है। अध्ययन में वैदिक साहित्य,
आयुर्वेदिक संहिताओं, आधुनिक शोधों तथा सरकारी दस्तावेजों
का उपयोग करते हुए भारतीय चिकित्सा प्रणाली की विकास यात्रा का विवेचन किया गया
है। शोध से स्पष्ट होता है कि आयुर्वेद केवल उपचार प्रणाली नहीं, बल्कि निवारक चिकित्सा, पोषण,
पर्यावरण संरक्षण, मानसिक स्वास्थ्य तथा जीवनशैली
प्रबंधन पर आधारित एक समग्र स्वास्थ्य विज्ञान है। सुश्रुत द्वारा विकसित शल्य
चिकित्सा, चरक
की निदान एवं चिकित्सा पद्धति, वाग्भट्ट
द्वारा अष्टांग आयुर्वेद का समन्वित प्रतिपादन तथा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की
अवधारणाएँ आज भी वैश्विक चिकित्सा जगत के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
वर्तमान समय में जीवनशैली जनित रोगों, मानसिक तनाव,
प्रतिरक्षा क्षमता में कमी तथा
पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियों के बीच भारतीय ज्ञान परम्परा की चिकित्सा
अवधारणाएँ पुनः वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता प्राप्त कर रही हैं। विश्व स्वास्थ्य
संगठन द्वारा पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देना तथा भारत में आयुष मंत्रालय की
विभिन्न पहलें इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। अतः भारतीय ज्ञान परम्परा केवल
अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि
भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के निर्माण का एक सशक्त आधार भी है।
शब्द कुंजी-भारतीय ज्ञान परम्परा, आयुर्वेद, चरक
संहिता, सुश्रुत
संहिता, योग, आयुष, पारंपरिक
चिकित्सा, समग्र
स्वास्थ्य।
