• April to June 2026 Article ID: NSS9877 Impact Factor:8.05 Cite Score:17 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9877 View PDf

    किशोरावस्था की समस्याएं व समाधान

      डॉ. बबीता
        सहायक आचार्य (समाजशास्त्र) श्री कल्याण राजकीय कन्या महाविद्यालय, सीकर (राज.)

शोध सारांश-  किशोरावस्था मनुष्य के जीवन के विकास क्रम में बचपन से वयस्क जीवन के मध्य की अवस्था है। इस अवस्था मंे किशोर तीव्र गति से शारीरिक, मनोवैज्ञानिक व संज्ञानात्मक विकास का अनुुभव करता है। यह मनुष्य के जीवन में परेशानी, तनाव, तूफान व सघंर्ष की अवस्था है। यह अदृश्य यौन लक्षणों से प्रजनन परिपक्वता के स्वरूप द्वारा परिवर्तन एवं विकास की अवस्था है, जो कि संम्पूर्ण सामाजिक, आर्थिक तथा भावनात्मक व सापेक्ष रूप से स्वतंत्रता का परिवर्तन काल है। परिवर्तन की इस अवस्था के दौरान किशोर वर्ग कई प्रकार के जटिल मुद्दों, लैंगिक भेदभाव, बाल विवाह, गर्भ धारण, प्रजनन व प्रसव के दौरान अनेक प्रकार की कठिनाइयों का अनुभव करते हैं। तथा प्रजनन व यौन स्वास्थ्य की समस्याओं को बढावा देते हैं। किशोरियों के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक कुपोषण है।

शब्द कुंजी-किशोरावस्था, स्वास्थ्य, कुपोषण, किशोरियां, प्रजनन मूलक, संज्ञानात्मक विकास।