• April to June 2026 Article ID: NSS9879 Impact Factor:8.05 Cite Score:29 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    पंडित दीनदयाल उपाध्याय का राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक दर्शन: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

      दिवाकर पारीक
        एमए, नेट (राजनीति विज्ञान) डी 133, आजाद नगर, भीलवाड़ा (राज.)

शोध सारांश-  प्रस्तुत शोध पत्र में भारतीय जनसंघ के प्रमुख वैचारिक चिंतक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक दर्शन का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन का उद्देश्य उन मूल सिद्धांतों का परीक्षण करना है जिनके माध्यम से उन्होंने भारतीय राजनीति, समाज एवं अर्थव्यवस्था के लिए भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। इस संदर्भ में उनके सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, एकात्म मानववाद, विराट पुरुष, स्वदेशी, अंत्योदय, विकेंद्रीकृत अर्थव्यवस्था तथा कृषि संबंधी विचारों का विवेचन किया गया है। अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि उनका चिंतन राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता, आर्थिक स्वावलंबन तथा समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण पर आधारित विकास-दृष्टि का प्रतिपादन करता है।

शब्द कुंजी-एकात्म मानववाद, अंत्योदय, स्वदेशी, सामाजिक समरसता, अखंड भारत, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद।