• April to June 2026 Article ID: NSS9881 Impact Factor:8.05 Cite Score:48 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9881 View PDf

    कौशल विकास एवं आर्थिक विकास

      सरोज कुशवाहा
        शोधार्थी, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा (म.प्र.)
      डॉ. दीपक नेमा
        प्राध्यापक एवं प्राचार्य (वाणिज्य) श्री रामाकृष्ण कालेज आंफ कामर्स एवं साइंस भरहुत नगर, सतना (म.प्र.)

शोध सारांश- कौशल विकास वर्तमान समय में आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। किसी भी देश की आर्थिक प्रगति उसके मानव संसाधनों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। यदि युवाओं को उचित शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण तथा व्यावसायिक दक्षता प्रदान की जाए, तो वे रोजगार प्राप्त करने के साथ-साथ देश की उत्पादकता में भी वृद्धि कर सकते हैं। भारत जैसे विकासशील देश में बढ़ती जनसंख्या, बेरोजगारी तथा गरीबी जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए कौशल विकास अत्यंत आवश्यक है।

    इस शोध पत्र का उद्देश्य कौशल विकास और आर्थिक विकास के मध्य संबंध का अध्ययन करना है। अध्ययन में यह विश्लेषण किया गया है कि किस प्रकार कौशल विकास रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास तथा राष्ट्रीय आय में वृद्धि में सहायक होता है। शोध के लिए द्वितीयक आंकड़ों का उपयोग किया गया है, जिनमें विभिन्न सरकारी रिपोर्ट, शोध पत्र तथा इंटरनेट स्रोत सम्मिलित हैं।

    अध्ययन से यह निष्कर्ष प्राप्त हुआ कि कौशल विकास कार्यक्रम युवाओं की रोजगार क्षमता को बढ़ाते हैं तथा आर्थिक विकास को गति प्रदान करते हैं। इसलिए सरकार तथा निजी संस्थानों को कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार करना चाहिए ताकि भारत को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके।

शब्द कुंजी-कौशल विकास, आर्थिक विकास, रोजगार, मानव संसाधन, कौशल भारत।