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April to June 2026 Article ID: NSS9884 Impact Factor:8.05 Cite Score:31 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9884 View PDf
केसीसी योजना (किसान क्रेडिट कार्ड योजना) में सहकारी बैंकों की भूमिका: देवास जिले के विशेष संदर्भ में
डॉ. जी एल खगोडे
सहायक प्राध्यापक (वाणिज्य) पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस माधव आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज, उज्जैन (म.प्र.)श्रीमती स्वाति राठौड़
शोधार्थी, पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस माधव आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज, उज्जैन (म.प्र.)
शोध सारांश - भारत एक कृषि प्रधान देश
है। सभ्यता के प्रारंभ से ही कृषि कार्य भारतीय जनसंख्या की जीविका उपार्जन के लिए
आय का महत्वपूर्ण स्त्रोत रहा है। भारतीय कृषि प्रणाली में कृषकों के लिए वित्तीय संसाधनों
की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण एवं जटिल कार्य है। मुख्यतः छोटे एवं सीमांत कृषकों को कई
बार कृषि संबंधी अपनी वित्त आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए गैर-संस्थागत ऋणप्रदान
कर्ताओं तथा साहूकारों पर आश्रित होना एक मजबूरी है। साहूकारों द्वारा भी उच्च ब्याज
दरों से किसने की मजबूरी का फायदा उठाकर उनका शोषण किया जाता रहा है। कई किसान साहकारों
के ऋण एवं ब्याज के कर्ज तले दयनीय जीवन जीने को मजबूर हो जाते हैं, यहां तक की कई
कृषकों द्वारा ऋणग्रस्तता के चलते आत्महत्या भी कर ली जाती है, इन्हीं समस्याओं के
समाधान के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 1998 में केसीसी योजना प्रारंभ की गई इस योजना
का उद्देश्य कृषकों को कम ब्याज दरों पर आसान तरीके से ऋण उपलब्ध कराना था।
प्रस्तुत शोध आलेख में मध्य प्रदेश राज्य के देवास जिले
में केसीसी योजना द्वारा कृषकों के ऋण वितरण में ‘सहकारी बैंकों’
की भूमिका का अध्ययन किया गया है। इस शोध आलेख में विश्लेषण किया
गया है की केसीसी योजना के परिणाम स्वरुप किसानों की आय में सुधार हुआ है, उनकी ऋण
शोधन क्षमता, जीवन स्तर, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा कृषि उत्पादन क्षमता में योजना के परिणाम
स्वरुप सुधार हुआ है। शोध के निष्कर्ष के द्वारा यह स्पष्ट किया गया है की केसीसी योजना
के सफल क्रियान्वयन में सहकारी बैंकों द्वारा कृषकों की ऋण उपलब्धता में सुगमता हुई
है, जिससे उनके जीवन स्तर तथा उनकी आय में सकारात्मक परिणाम दृष्टिगोचर हुए हैं।
शब्द कुंजी- केसीसी योजना, ब्याज, ऋण,
ऋणदाता, सहकारी बैंक, फसल चक्र, आर्थिकस्थिति।
