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April to June 2026 Article ID: NSS9886 Impact Factor:8.05 Cite Score:18 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
कार्यशील एवं घरेलू माताओं के किशोर अपराधियों की प्रकृति का तुलनात्मक अध्ययन
डॉ. अमृता मौर्या
641, रेलवे कॉलोनी, झाँसी (उ.प्र.)
प्रस्तावना - किशोर अपराधियों के अपराध
संबंधी समस्यायें केवल पारिवारिक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक समस्या ही नहीं वरन् वह कानूनी
समस्या भी हैं। किशोरों में शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक, सामाजिक परिवर्तन तीव्र गति
से होते हैं। इस समय परिवार, समाज व विद्यालय से प्राप्त उपेक्षा, लाड़ प्यार की कमी,
अत्यधिक कठोर अनुशासन, संसाधनों की कमी, उच्च महत्वाकांक्षाएँ और आर्थिक तंगी, माता
पिता द्वारा उन पर निगरानी का अभाव या उनका अकेलापन, शारीरिक दोष व हीनभावना आदि के
कारण किशोर गलत संगत में पड़ जाते हैं। नशे की लत व इन्टरनेट का दुरूपयोग करने से अपराधी
बनने की संभावनाएँ और प्रबल हो जाती हैं। वे नशे की लत के चलते वे नशीले पदार्थों की
खरीद फरोक्त व अवैध परिवहन करने लगते हैं। मारपीट, झगड़ा, हमला, संपत्ति की तोड़फोड़,
सामग्री चोरी, वाहन चोरी करने लगते हैं। वे गिरोह बनाकर सार्वजनिक सम्पत्ति की हानि
करने के साथ-साथ उपद्रव करने लगते हैं। आजकल साइबर अपराध बढ़ रहे हैं। फर्जी सोशल अकाउंट
बनाना, हैकिंग, धोखाधड़ी, साइबर बुलिंग आदि की घटनायें बढ़ रही हैं। वे व्यक्तिगत या
समूह में यौन अपराध करते हैं। सामूहिक अपराध, साथियों के दबाव में आने के कारण किये
जाते हैं। किशोरों द्वारा किये गये अपराध अक्सर आवेश में आकर किये जाते हैं। उनके अपराधों
में पूर्व नियोजन होने की संभावनाएँ कम होती हैं। अधिकतर परिस्थिति जन्य होते हैं।
चूंकि किशोरों के अपराधी बनने में पारिवारिक वातावरण भी एक कारक माना गया है। पारिवरिक
वातावरण कार्यशील और घेलू महिलाओं के परिवारों में भिन्न-भिन्न प्रकार का होता है।
दोनों प्रकार की महिलाओं की कार्यशैली, चिंतन, समय व संसाधनों की उपलब्धता में भी भिन्नता
पाई जाती है। इस कारण उनका अपने बच्चों का पालन पोषण का तरीका भी भिन्न-भिन्न होता
है। इस कारण कार्यशील और घरेलू महिलाओं के किशोर अपराधियों के अपराध की प्रकृति में
भी भिन्नता हो सकती है। यह ज्ञात करने के लिये शोधार्थी ने अपने शोध का विषय- ‘‘कार्यशील
एवं घरेलू माताओं के किशोर अपराधियों की प्रकृति का तुलनात्मक अध्ययन’’ चुना है।
