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April to June 2026 Article ID: NSS9891 Impact Factor:8.05 Cite Score:36 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9891 View PDf
प्राचीन ज्ञान प्रणाली में गृहस्थ आश्रम का समाज में योगदान
प्रिया सिंह
शोधार्थी, प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ (उ.प्र.)
शोध सारांश- प्रस्तुत लेख में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में गृहस्थ आश्रम के सामाजिक, महत्व का वर्णन किया
गया है। गृहस्थ आश्रम को सभी आश्रमों का आधार माना गया है, क्योंकि यही परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था
का संचालन करता है। इसके माध्यम से कृषि, व्यापार, संस्कार, शिक्षा, दान, सेवा तथा सांस्कृतिक
परंपराओं का संरक्षण होता है। परिवार बच्चों में नैतिक मूल्यों और सामाजिक
उत्तरदायित्व की भावना विकसित करता है। आधुनिक समय में संयुक्त परिवारों के विघटन
के बावजूद गृहस्थ आश्रम की शिक्षाएँ पारिवारिक एकता, सामाजिक समरसता, नैतिकता और संतुलित
जीवन के लिए आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं।
शब्द कुंजी-गृहस्थ आश्रम, समाज, महाभारत, गीता।
