• April to June 2026 Article ID: NSS9895 Impact Factor:8.05 Cite Score:9 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    भूमि अधिग्रहण एक अमानवीय कृत्य

      डॉ. मनीषा सिंह मरकाम
        सहा. प्रा. (हिन्दी) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, श्री अटल बिहारी वाजपेयी शा. कला एवं वाणिज्य महा., इन्दौर (म.प्र.)
      पूजा वर्मा
        शोधार्थी, प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, श्री अटल बिहारी वाजपेयी शा. कला एवं वाणिज्य महा., इन्दौर (म.प्र.)

शोध सारांश- ‘‘भूमि अधिग्रहण” शब्द जो की प्राचीन काल से दलितों के लिए काल के सर्प के समान है जो सदियों से उनकी भूमि को निगलता चला आया है। दलित वर्ग के पास यदि भूमि का छोटा -सा टुकड़ा भी रहा तो वह गांव में ‘विकास के नाम पर जमीदारों, सेठों और सवर्णों की नजरों से छिप नहीं सका है। ऐसी ही कई घटनाओं को हमारे फिल्म निर्माता भी कई दशकों से पर्दे पर उतारते आ रहे हैं। जैसे- मदर इंडिया, हिम्मतवाला, जाॅली एलएलबी 3, जय गंगाजल जैसी कई फिल्मों के नाम गिनाए जा सकते हैं। सवर्णों ने यह कभी नहीं चाहा कि दलित कभी भी उनकी बराबरी करें और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर बैठे इसलिए प्रथम उन्होंने दलित वर्ग को भूमि के आधार पर रात दिन खत्म न होने वाले ब्याज पर कर्ज दिया, फसल आने पर दलितों की ओर से दी गई रकम में जमींदार वर्ग का सूत भी पुरा न हो सकता था तो मूल की तो बात ही क्या की जाए।

शब्द कुंजी- फिल्म - चलचित्र,ऋण - कर्ज, अधिग्रहण- हथियाना, बंधुआ - आजीवन बंधकर काम करना।