• April to June 2026 Article ID: NSS9907 Impact Factor:8.05 Cite Score:22 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    समान नागरिक संहिता भारत में: एक चर्चा: एक शैक्षणिक शोध पत्र

      डॉ. नाजनीन खान
        एपीएसयू विश्वविद्यालय, रीवा (म.प्र.)
      डॉ. निर्मल कुमार पगारिया
        सेवानिवृत्त प्रोफेसर, इंदौर लॉ कॉलेज, इंदौर (म.प्र.)

शोध सारांश-प्रस्तुत शोध पत्र समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) की भारतीय संवैधानिक, सामाजिक एवं न्यायिक परिप्रेक्ष्य में विस्तृत विवेचना प्रस्तुत करता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति निदेशक तत्त्वों के अंतर्गत समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है, जिसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार एवं गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों को एकीकृत करना है। यह शोध पत्र UCC के पक्ष एवं विपक्ष में विद्यमान तर्कों, न्यायपालिका के दृष्टिकोण, विभिन्न धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों की तुलनात्मक स्थिति, उत्तराखंड समान नागरिक संहिता अधिनियम 2024, सांख्यिकीय आंकड़ों एवं अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य का विश्लेषण करता है। शोध से यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि UCC के लागू होने के लिए व्यापक सामाजिक सहमति, संवेदनशील राजनीतिक इच्छाशक्ति एवं संविधान के मूल मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता अनिवार्य है।

शब्द कुंजी-समान नागरिक संहिता, अनुच्छेद 44, व्यक्तिगत कानून, धर्मनिरपेक्षता, लैंगिक न्याय, संवैधानिक विधि।