• January to March 2026 Article ID: NSS9913 Impact Factor:8.05 Cite Score:12 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    केदारनाथ अग्रवाल के काव्य में सांस्कृतिक एवं साहित्यिक चेतना

      डॉ. बालेश्वर प्रसाद
        ऐसोसिएट प्रोफेसर (हिन्दी) अतर्रा स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अतर्रा, बाँदा (उ.प्र.)

शोध सारांश-  केदारनाथ अग्रवाल के काव्य में सांस्कृतिक एवं साहित्यिक चेतना अत्यंत विकसित है। केदारनाथ अग्रवाल के काव्य में साहित्यक और सांस्कृतिक चेतना का आधार लोकजीवन, प्रकृति प्रेम और प्रगतिशील मूल्य हैं। उनकी कविताओं में जनपदीय संस्कृति, श्रम की महत्ता और मानवीय संवेदनाओं के गहरे दर्शन होते हैं।साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना की प्रमुख विशेषताएं लोकधर्मिता और जनजीवन उनकी रचनाओं में बुंदेलखंड और ग्रामीण भारत की संस्कृति, मेले, त्यौरियां, और जनसामान्य के जीवन की सहजता साफ झलकती है।प्रकृति और मनुष्य का साहचर्य प्रकृति उनके लिए सिर्फ सौंदर्य का साधन नहीं, बल्कि जीवन की प्रेरणा और माँ जैसी पूज्य है। वे खेत-खलिहान और मेहनत करने वाले आम आदमी के कवि हैं। उनकी कविताओं में साम्यवादी और मानवतावादी विचारधारा प्रमुखता से उभरती है।दांपत्य और पारिवारिक प्रेमरू उन्होंने भारतीय समाज की सांस्कृतिक परंपरा के भीतर स्त्री-पुरुष के समान अधिकार और पवित्र दांपत्य प्रेम के सुंदर चित्र उकेरे हैं।यदि आप चाहें तो मैं केदारनाथ अग्रवाल की किसी विशेष रचना जैसे श्युग की गंगाश् या श्फूल नहीं रंग बोलते हैंश् के आधार पर उनकी चेतना का और अधिक विस्तार कर सकता हूँ। इस प्रकार उक्त शोधपत्र की शोधात्मक विवेचना से यह स्पष्ट हो जाता है कि केदारनाथ अग्रवाल के काव्य में सांस्कृतिक एवं साहित्यिक चेतना की चेतनाएँ विद्यमान हैं।