• October to December 2025 Article ID: NSS9914 Impact Factor:8.05 Cite Score:12 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    निराला साहित्य में मानवतावादी तथा जनवादी दृष्टि

      डॉ. बालेश्वर प्रसाद
        ऐसोसिएट प्रोफेसर (हिन्दी) अतर्रा स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अतर्रा, बाँदा (उ.प्र.)

शोध सारांश- निराला के साहित्य में मानव-प्रेम और करुणा का विशेष स्थान है। वे प्रत्येक मनुष्य के सम्मान और अधिकारों के पक्षधर थे। उनकी प्रसिद्ध कविताएँ ’भिक्षुक’ वह तोड़ती पत्थर और ’सरोज-स्मृति’ मानव जीवन के दुख, संघर्ष और संवेदनाओं का सजीव चित्र प्रस्तुत करती हैं। इन रचनाओं में उन्होंने पीड़ित और असहाय लोगों के प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त की है। निराला ने अपने साहित्य में आम जनता के जीवन, उनकी समस्याओं और शोषण को प्रमुखता दी। उन्होंने सामाजिक असमानता, रूढ़ियों और अन्याय का विरोध किया। उनकी रचनाएँ जनता की आवाज बनकर सामने आती हैं और सामाजिक परिवर्तन का संदेश देती हैं। वे श्रमिकों, किसानों और वंचित वर्ग के संघर्ष को साहित्य का विषय बनाते हैं।निराला का साहित्य केवल सौंदर्य और भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें मानवता, समानता और सामाजिक न्याय की सशक्त चेतना भी विद्यमान है। मानवतावादी और जनवादी दृष्टिकोण के कारण उनका साहित्य आज भी प्रासंगिक है तथा समाज को संवेदनशील और न्यायपूर्ण बनाने की प्रेरणा देता है।