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July to September 2025 Article ID: NSS9915 Impact Factor:8.05 Cite Score:15 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
शमशेर बहादुर सिंह के काव्य में बिम्ब योजना
डॉ. बालेश्वर प्रसाद
ऐसोसिएट प्रोफेसर (हिन्दी) अतर्रा स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अतर्रा, बाँदा (उ.प्र.)
शोध सारांश- शमशेर बहादुर सिंह के काव्य में बिम्ब योजना अत्यंत
विकसित है। शमशेर की भाषा प्रधानतः बिम्बात्मक है। शमशेर बहादुर सिंह की बिम्ब-योजना
आधुनिक हिंदी कविता में अद्वितीय है। उन्हें श्बिम्ब और शिल्प के महाकविश् के रूप में
जाना जाता है। उनकी कविताओं में अमूर्त भावों को मूर्त रूप देने, रंगों और प्राकृतिक
तत्वों के माध्यम से अनूठे शब्द-चित्र उभारने की अद्भुत क्षमता थी। शमशेर की कविताओं
में आँख, कान और स्पर्श को जगाने वाले दृश्य और श्रव्य बिम्ब मिलते हैं।रंगों का प्रयोगरू
श्नीलाश् और श्पीलाश् रंग उनके प्रिय विशेषण हैं, जो आसमान, चांदनी या शाम के चित्रों
को जीवंत करते हैं प्रकृति उनके यहाँ स्थिर नहीं रहती, बल्कि गतिमान और मानवीय क्रियाओं
से जुड़ी होती है (जैसे श्उषाश् कविता का भोर का दृश्य) । भौतिकता को हल्का करके किसी
गहरे और सूक्ष्म भाव या चेतना की ओर इशारा करना उनकी बिम्ब-योजना की मुख्य विशेषता
इस प्रकार उक्त शोधपत्र की शोधात्मक विवेचना से यह स्पष्ट हो जाता है कि शमशेर बहादुर
सिंह के काव्य में बिम्ब योजना की चेतनाएँ विद्यमान हैं।
