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April to June 2026 Article ID: NSS9918 Impact Factor:8.05 Cite Score:10 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
वाश चित्रण में साहित्य एवं भक्ति का संगम : शैलेंद्रनाथ डे एवं क्षितिंद्रनाथ मजुमदार का कला विस्तार
आस्था कुमावत
शोधार्थी (चित्रकला) मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)
शोध सारांश-भारतीय कला धारा में नवीन प्रयोगों के साथ विकास देखा गया है जिसने
भारतीय कला को और अधिक विकसित व प्रसारित किया जिसका प्रमुख उदाहरण बंगाल शैली है जिसके
प्रचार के साथ भारत में पुनर्जागरण आंदोलन का प्रसार हुआ जिससे हमारी भारतीय कला विदेशी
कला पद्धति की जकड़न से मुक्त हो पाई। इसमें मुख्य रूप से अवनींद्रनाथ टैगोर और उनके
शिष्यों की बात करना अधिक सार्थक होगा क्योंकि इन्हीं के प्रयोगों से ही ये विधा इतनी
विकसित और प्रसारित हो पाई जिनमें मुख्य रूप से हम बात करे शैलेन्द्र नाथ डे एवं शीतिंद्रनाथ
मजुमदार की तो एक ने साहित्यिक व काव्यात्मक रूप से इस तकनीक को आगे बढ़ाया एवं एक
ने इसे धार्मिक व भक्तिरूप में प्रसारित करा।
शब्द कुंजी-बंगाल शैली, वाश, तकनीक, धर्म, कला, साहित्य।
