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April to June 2026 Article ID: NSS9921 Impact Factor:8.05 Cite Score:8 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
नाथद्वारा की हरित गणगौर: पुष्टि मार्गीय परंपरा, समाज-संस्कृति एवं कलात्मक वैभव
सुरभि जैन
स्वतंत्र शोधार्थी, नाथद्वारा (राज.)
शोध सारांश- राजस्थान की लोक-संस्कृति में गणगौर का पर्व शिव (ईसर) और
पार्वती (गौरी) के सात्विक दांपत्य, सौभाग्य
और प्रकृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है। सामान्यतः यह पर्व चैत्र शुक्ल तृतीया को
संपन्न होता है,
परंतु मेवाड़ अंचल के
सुप्रसिद्ध वैष्णव तीर्थनाथद्वारामें यह उत्सव अपनी अनूठी
सांस्कृतिक एवं धार्मिक विशिष्टता के कारण संपूर्ण भारत में अद्वितीय स्थान रखता
है। नाथद्वारा में गणगौर किसी एक दिन का पर्व न होकर'पंचरंगी गणगौर'के
रूप में पांच दिनों तक अत्यंत हर्षोल्लास केसाथ मनाया जाता है। इन पांच दिनों में
से चैत्र शुक्ल सप्तमी को मनाई जाने वाली'हरित गणगौर' (हरा गणगौर)अपने दिव्य स्वरूप, पुष्टि मार्गीय सेवा-भावना, ऋतु-परिवर्तन के नैसर्गिक संदर्भ और
समाज-संस्कृति के गहरे अंतर्संबंधों के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय है। प्रस्तुत
शोध-पत्र नाथद्वारा की हरित गणगौर के ऐतिहासिक संदर्भों, पुष्टि मार्गीय दर्शन (शुद्धाद्वैत), सेवा-प्रणाली, वस्त्राभूषण एवं चित्रकला शैली, तथा इसके सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव का विषद विश्लेषण करता
है।
शब्द कुंजी-पुष्टि
मार्ग, श्रीनाथजी हवेली, पंचरंगी गणगौर, पिछवाई
चित्रकला, शुद्धाद्वैत दर्शन।
