• April to June 2026 Article ID: NSS9923 Impact Factor:8.05 Cite Score:30 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं परंपरा का सामाजिक विश्लेषण: एक अध्ययन

      डॉ. पुष्पा मिश्रा
        सहायक प्रोफेसर (समाजशास्त्र) शीट पी.जी. कॉलेज, गहनी, वाराणसी (उ.प्र.) महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, विश्वविद्यालय, वाराणसी (उ.प्र.)

शोध सारांश-  भारतीय ज्ञान प्रणाली एक दीर्घकालीन और बहुआयामी बौद्धिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है, जिसका विकास सदियों से अवलोकन, चिंतन, अनुभव, प्रयोग, संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और व्यावहारिक जीवन के माध्यम से हुआ है। इसमें दर्शन, भाषा, साहित्य, गणित, खगोलशास्त्र, चिकित्सा, कृषि, स्थापत्य, नैतिकता, शिक्षा, पर्यावरण, शासन, कला, शिल्प और सामाजिक संगठन से संबंधित ज्ञान सम्मिलित है। भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल प्राचीन ग्रंथों अथवा धार्मिक विचारों का संग्रह मानना उचित नहीं है। यह एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था भी है जिसके माध्यम से विभिन्न समुदायों ने ज्ञान का निर्माण, संरक्षण, प्रसार, परीक्षण और पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण किया। प्रस्तुत शोध-पत्र भारतीय ज्ञान प्रणाली का सामाजिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करता है तथा शिक्षा, परिवार, समुदाय, पर्यावरण, नैतिकता, व्यवसाय, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक मूल्यों के साथ उसके संबंधों का अध्ययन करता है। शोध का प्रमुख तर्क है कि भारतीय ज्ञान परंपराएँ विशिष्ट सामाजिक परिस्थितियों में विकसित हुईं और उनका संबंध दैनिक जीवन से गहरा था। ज्ञान का प्रसारण गुरुकुल, गुरु-शिष्य संबंध, परिवार, समुदाय, मंदिर, मठ, शिल्प-परंपरा और स्थानीय संस्थाओं के माध्यम से हुआ। साथ ही, भारतीय ज्ञान के सामाजिक इतिहास में जाति, लिंग, सामाजिक स्थिति और ज्ञान तक असमान पहुँच जैसी सीमाएँ भी दिखाई देती हैं। इसलिए समकालीन संदर्भ में भारतीय ज्ञान का अध्ययन न तो अंध-प्रशंसा पर आधारित होना चाहिए और न ही पूर्ण अस्वीकृति पर। आवश्यक है कि इसकी उपलब्धियों और सीमाओं दोनों का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया जाए। यह शोध-पत्र आधुनिक शिक्षा, सतत विकास, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक संरक्षण में भारतीय ज्ञान की संभावित उपयोगिता पर भी विचार करता है। निष्कर्षतः भारतीय ज्ञान का पुनरुत्थान अतीत की यांत्रिक पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि उसके उपयोगी तत्वों का समावेशी, प्रमाण-आधारित और आलोचनात्मक पुनर्पाठ होना चाहिए।

मुख्य शब्द: भारतीय ज्ञान प्रणाली, परंपरा, समाज, स्वदेशी ज्ञान, सांस्कृतिक विरासत