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July to September 2026 Article ID: NSS9947 Impact Factor:8.05 Cite Score:7 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
मध्यप्रदेश राज्य में जनजातियों के कल्याण में शासकीय योजनाओं का प्रभाव
जगदीश उइके
डॉ. भीमराव अंबेडकर शासकीय महाविद्यालय, आमला, जिला बैतूल (म.प्र.)
शोध सारांश- मध्यप्रदेश भारत में
सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्यावाला राज्य है। राज्य में भील, गोंड, बैगा, भारियाऔरसहरियाजैसी प्रमुख
जनजातियाँ निवास करती हैं। इस शोध पत्र का मुख्य उद्देश्य राज्य और केंद्र सरकार
द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के आदिवासियों के सामाजिक-आर्थिक जीवन
पर पड़ने वाले प्रभाव का मूल्यांकन करना है।जनजातियों के अधिकांश संसाधन अविकसित व
अगम्य क्षेत्रों में हैं। ये लोग दूर-दराज की बस्तियों व गाँवों में रहते हैं।
आजकल, इनकी एक छोटी संख्या
कस्बों, शहरों व नगरो में भी
रहने लगी है। जनजातीय विकास दर की प्रक्रिया धीमी है। विभिन्न संघीय एवं राज्य
कानूनों के तहत जनजातियों को कई अधिकार व रियायतें दी गई हैं। लेकिन प्रवर्तन
एजेंसियों की अज्ञानता व उदासीनता के कारण, इन्हें इन कानूनों से मिलने वाले
लाभों से वंचित रखा जा रहा है। विकास कार्यक्रमों को संचालित करने वाली प्रवर्तन
एजेंसियों की बहुलता ने समस्या को और अधिक बढ़ा दिया है। कई बार ये ऐजेसियाँ अपने
प्रयासों का समन्वय करने में असमर्थ होती हैं या फिर लंबी अवधि तक के कार्यक्रमों
का पालन करने में विफल रहती हैं। वास्तव में, सरकार द्वारा किये गये प्रयासों के
बावजूद भी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद गरीब लोगों तक नहीं पहुँच पा रहाहै। इसके लिये
मूल समस्या संसाधनों के कमी की नहीं है, बल्कि
समस्या कुप्रबंधन की है। स्वतंत्रता के पूर्व, देश के नेता व समाज सुधारकों ने भी
जनजातियों के कल्याण के महत्व को समझा और देश के आजाद होने के बाद संविधान निर्माण
के समय संविधान में इनके लिए विशेष प्रावधान निर्मित किये गये हैं। प्रथम
पंचवर्षीय योजना से ही जनजातीय लोगों के प्रति चिंता रही है। उक्त पृष्ठभूमि में, वर्तमान अध्ययन
जनजातियों के समग्र विकास पर केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विकास
कार्यक्रमों के प्रभाव की समीक्षा की गई है।
शब्द कुंजी-जनजातीय कल्याण, शासकीय योजनाएँ, मध्य प्रदेश, सामाजिक-आर्थिक विकास, प्रभाव मूल्यांकन।
