• July to September 2026 Article ID: NSS9948 Impact Factor:8.05 Cite Score:17 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9948 View PDf

    21वीं सदी में मध्य पूर्व एशिया में सऊदी अरब और ईरान के संबंध: प्रमुख महाशक्तियों, हॉर्मूज स्ट्रेट और इस्राइल के विशेष संदर्भ में

      सुदीप बिड़ला
        सहायक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष (राजनीति विज्ञान) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, महाराजा भोज शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, धार (म.प्र.)
      संदीप बिड़ला
        सहायक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष (राजनीति विज्ञान) प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खरगोन (म.प्र.)

शोध सारांश-  21वीं सदी के मध्य पूर्व में सऊदी अरब और ईरान के आपसी संबंध भू-राजनीतिक स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और वैचारिक प्रभुत्व की धुरी रहे हैं। यह शोध पत्र दोनों देशों के संबंधों का विश्लेषण महाशक्तियों (अमरीका, चीन, रूस, यूरोपीय संघ), सामरिक जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मूज' तथा अमरीका के प्रमुख रणनीतिक सहयोगी 'इस्राइल' के विशेष संदर्भ में करता है। इस क्षेत्र में अमरीकी-इस्रायली गठजोड़ और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य व सामरिक तनाव ने खाड़ी देशों के सुरक्षा समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। जहाँ एक ओर अमरीकी सुरक्षा छतरी और 'अब्राहम समझौता' इस क्षेत्र में इस्राइल की अवस्थिति को सुदृढ़ करते हैं, वहीं दूसरी ओर चीन की मध्यस्थता और रूस के साथ ऊर्जा कूटनीति ने बहुध्रुवीय प्रतिस्पर्धा को जन्म दिया है। यह शोध पत्र स्पष्ट करता है कि सऊदी-ईरान के आपसी तनाव और इस्रायली आयाम के कारण मध्य पूर्व वैश्विक संघर्ष और कूटनीतिक पुनर्संरचना के सबसे संवेदनशील दौर से गुजर रहा है।शब्द कुंजी- सुन्नी-शिया वैचारिक विभाजन, क्षेत्रीय आकांक्षायें, भू-राजनीतिक हित, पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व एशिया, 21वीं सदी, अब्राहम समझौता, सऊदी अरब, ईरान, इजरायल, सीरिया, अमरीका, रूस, चीन, स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मूज, खाड़ी, ऊर्जा सुरक्षा, सामरिक जलमार्ग, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी, जेसीपीओए, ओपेक प्लस, कच्चा तेल, हिजबुल्लाह, हूती, आतंकवाद, अप्रवासन, बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव, अवरोधन।