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July to September 2026 Article ID: NSS9951 Impact Factor:8.05 Cite Score:46 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9951 View PDf
परंपरा से प्रमाण तक: चातुर्मास खाद्य एवं पर्व-परंपराओं का भारतीय ज्ञान प्रणाली और वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य से वैचारिक विश्लेषण
डॉ. दीपा जोशी
प्रोफेसर, प्रबंधन विभाग (पीजी) श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस, इंदौर (म.प्र.)
शोध सारांश- चातुर्मास
भारतीय सांस्कृतिक एवं ज्ञान-परंपरा में एक महत्वपूर्ण अवधि है, जिसमें आहार-संयम,
उपवास, ऋतु-अनुकूल जीवनचर्या तथा विविध पर्व-परंपराएँ परस्पर संबद्ध दिखाई देती
हैं। प्रस्तुत वैचारिक अध्ययन का उद्देश्य चातुर्मासीन खाद्य एवं पर्व-परंपराओं
को भारतीय ज्ञान प्रणाली के
परिप्रेक्ष्य में समझना तथा ऋतुचर्या, आहार-संयम, उपवास, पारंपरिक खाद्य-ज्ञान और
सांस्कृतिक निरंतरता के बीच संभावित अंतर्संबंधों का आलोचनात्मक विश्लेषण करना है।
आयुर्वेद में ऋतु के अनुरूप आहार एवं जीवनचर्या में परिवर्तन की व्यवस्थित अवधारणा
मिलती है (Thakkar et al., 2011), जबकि भारतीय पारंपरिक खाद्य साहित्य भोजन को
स्थानीय पर्यावरण, संस्कृति, परंपरा और खाद्य-प्रसंस्करण से संबद्ध करता है
(Sarkar et al., 2015)। पारंपरिक एवं स्थानीय भारतीय खाद्य पदार्थ पर
उपलब्ध शोध उनके पोषण संबंधी गुणों के दस्तावेजीकरण की संभावनाएँ प्रस्तुत करता
है, यद्यपि पोषण
मूल्य को सीधे पारंपरिक प्रथाओं की स्वास्थ्य-प्रभावशीलता के प्रमाण के रूप में ,की स्वास्थ्य-प्रभावशीलता के प्रमाण के रूप में
नहीं माना जा सकता (Kapoor et al., 2022)। शारीरिक-क्रियात्मक आयामों की चर्चा करता
है, लेकिन विभिन्न धार्मिक उपवास-प्रथाओं की विविधता के कारण उनके निष्कर्षों को
सीधे चातुर्मास के प्रत्येक व्रत पर सामान्यीकृत
करना उचित नहीं है (Trepanowski & Bloomer, 2010; Trabelsi et
al., 2022)।
अध्ययन वैचारिक अनुसंधान अभिकल्प
पर आधारित है तथा पाठ्य
स्रोतों, उपलब्ध सहकर्मी-समीक्षित शोध-साहित्य और संरचित अवलोकन/अनुभव
को व्याख्यात्मक आधार के रूप में उपयोग करता है। विश्लेषण में प्रमाणों को पाठ्य, आयुर्वेदिक,
पोषण संबंधी तथा समकालीन वैज्ञानिक स्तरों पर पृथक रखते हुए त्रिकोणीकरण
का प्रयास किया गया है। अध्ययन यह प्रस्तावित करता है कि चातुर्मासीन खाद्य एवं पर्व-परंपराओं को
ऋतु-अनुकूलन,
आहार-संयम, अनुष्ठानिक अनुशासन, सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक निरंतरता
के अंतर्संबद्ध आयामों के रूप में समझा जा सकता है।
शब्द कुंजी-चातुर्मास, भारतीय ज्ञान
प्रणाली, ऋतुचर्या, आहार-संयम, उपवास, पारंपरिक खाद्य-परंपरा, पर्व-संस्कृति, सांस्कृतिक
निरंतरता, ऋतु-अनुकूलन, भारतीय ज्ञान प्रणाली।
