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October to December 2024 Article ID: NSS9953 Impact Factor:8.05 Cite Score:38 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9953 View PDf
भारतीय समाज पर वैश्वीकरण के प्रभाव का एक समाजशास्त्रीय अध्ययन
डॉ. हरिचरण मीना
प्रोफेसर (समाजशास्त्र) श.कै.रि.सि.राजकीय महाविद्यालय, सवाईमाधोपुर (राज.)
शोध सारांश- भारतीय समाज सांस्कृतिक
विविधता मे एकता एवं सांस्कृतिक समृद्धि वाला समाज हैं। भारत मे कश्मीर से कन्याकुमारी
एवं कच्छ से अरूणाचल तक विभिन्न धर्मए सम्प्रदायए जातिए मजहब एवं संस्कृति के लोग निवास
करते हैं एवं उनके रहन सहन खान पान वेशभूषा बोलचाल भाषा रीतिरिवाज मे विविधता के होते
हुए सभी भारतीय समाज का अभिन्न अंग हैं। वैश्वीकरण एक प्रक्रिया हैं जिसके द्वारा पूरे
विश्व की सामाजिक इकाई उनकी संस्कृतियां और अर्थव्यवस्थाएं परस्पर जुड जाती हैं। यह
एक ऐसी सतत प्रक्रिया हैं जो संचार व प्रोधोगिकी प्रचार प्रसार के कारण अनवरत चलती
रहती हैं। यह पूरे विश्व के आधुनिक समाज को नियंत्रित करती हैं एवं पूरे विश्व मे आवश्यकता
की सभी वस्तुए मांग के अनुरूप उपलब्ध होने मे सहूलियत प्रदान करती हैं। वैश्वीकरण मे
विचार, विचारधारा, भूमिका, सांस्कृतिक मान्यताओ का अद्यतित आदान प्रदान होता हैं। यह
सामाजिक मुद्धो को नए एवं अनूठे तरीको से हल करने की अनुमति देता हैं। वैश्वीकरण संस्कृति,
समाज, राजनीति, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली प्रक्रिया हैं।
वैश्वीकरण का भारतीय समाज की संस्कृति, संगीत, फिल्म,
परिवार, विवाह, जाति व्यवस्थाए धर्म, परम्परा, भाषा, व्यापार, अर्थव्यवस्था, रोजगार,
शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार इत्यादि पर सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनो प्रकार से देखा
जा सकता हैं। वैश्वीकरण को भारतीय समाज मे संस्कृति का सजातीयकरण एवं ग्लोकलाइजेशन
के रूप मे देखा जा सकता हैं। महिलाओ पर वैश्वीकरण के प्रभाव को अधिकारए स्वतंत्रताए
न्याय के प्रति जागरूकताए महिला सशक्तिकरणए तकनीकी शिक्षाए वैश्विक मंचो पर पहुंचनाए
रहन सहन इत्यादि मे सकारात्मक प्रभाव के रूप मे देखा जा सकता हैं दूसरी ओर एकल परिवार,
तलाक होना, विवाह संस्था पर बढता खतरा, कुटीर उद्योगों पर खतरा, दोहरी जिम्मेदारी इत्यादि
को नकारात्मक प्रभाव के रूप मे देखा जा सकता हैं। युवाओं पर भी वैश्वीकरण के प्रभाव
को गुणवत्तापूर्ण शिक्षाए उच्च पैकेज सैलरीए स्टार्टअप्स, पश्चिमी एवं भारतीय मूल्यो
का सम्मिश्रण के रूप में सकारात्मक प्रभाव के रूप मे देखा जा सकता हैं वही दूसरी ओर
युवाओं का विदेश की ओर पलायन, परम्परागत भारतीय मूल्यों की अवहेलना इत्यादि को नकारात्मक
प्रभाव के रूप मे देखा जा सकता हैं।
शब्द कुंजी-सांस्कृतिक विविधता, सांस्कृतिक समृद्धि, सतत प्रक्रिया,
प्रौधोगिकी, सहूलियत, अद्यतित आदान प्रदान,
सजातीयकरण एवं ग्लोबलाइजेशन।
