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July to September 2026 Article ID: NSS9959 Impact Factor:8.05 Cite Score:23 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
शिक्षा के अधिकार से संबंधित संवैधानिक उपबंधों का अध्ययन
विजय लक्ष्मी जोशी
सहायक प्राध्यापक, शासकीय विधि महाविद्यालय, शाजापुर (म.प्र.)डॉ. रश्मि शर्मा
सहायक प्राध्यापक, शासकीय विधि महाविद्यालय, उज्जैन (म.प्र.)
शोध सारांश- शिक्षा का अधिकार एक मूलभूत मानवाधिकार हैं। एक शिक्षित
नागरिक ही स्वयं का विकास करने के साथ-साथ अपने देश के विकास में योगदान दे सकता हैं।
शिक्षा न केवल जीवन का अंधकार मीटाती हैं वरन रोजगार के साधन उपलब्ध कराने के साथ ही
व्यक्ति के व्यक्तिगत विकास में सहायक होती है। शिक्षाविहिन प्राणी पशु के समान हैं।
शिक्षा ग्रहण करने में किसी व्यक्ति की निर्धनता बाधा न बने इस हेतु अंतराष्ट्रीय प्रसंविदाओं
द्वारा शिक्षा के अधिकार को मानवाधिकार के रूप में घोषित किया गया हैं। भारत में निःशुल्क
एवं अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा के अधिकार की मांग आजादी के पूर्व से ही उठने लगी फिर
जब भारत आजाद हुआ एवं स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई तब संविधान
निर्माताओं ने तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षा के अधिकार को मूल अधिकार
के भाग में न रखकर नितिनिदेशक तत्व में शामिल किया जिसमें संविधान लागू होने के 10
वर्ष के भीतर 6-14 वर्ष की आयु के सभी बालकों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध
कराने का राज्य को निर्देश दिया गया किंतु इस दिशा में कोई सार्थक प्रयास नहीं होने
पर 86वें संविधान संशोधन 2001 द्वारा इसे मूल अधिकार घोषित किया गया। प्रस्तुत शोधपत्र
में शिक्षा, शिक्षा के अधिकार को परिभाषित कर शिक्षा के अधिकार से संबंधित संवैधानिक
उपबंधों का संक्षिप्त वर्णन कर निष्कर्ष प्रस्तुत किया गया हैं।
शब्द कुंजी-शिक्षा, शिक्षा का अधिकार,
संवैधानिक उपबंध।
