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July to September 2026 Article ID: NSS9960 Impact Factor:8.05 Cite Score:17 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
निराला के रचना संसार और दलित विमर्श
डॉ. मंजुलता चैधरी
सह. प्राध्यापक (हिन्दी) शासकीय महाविद्यालय, अलोट (म.प्र.)
प्रस्तावना- हिन्दी साहित्य के छायावादी निराला संघर्ष के कवि माने
जाते है निराला का जन्म 21 फरवरी 1899 को बंगाल के मेदिनीपुर जिले के महिशादल नामक
तहसील में हुआ थां निराला का पैतृक गाॅव गढ़कोला था जो उत्तरप्रदेश के उन्नाव जिले में
स्थित है। निरालाजी की प्रारम्भिक शिक्षा बंगाल में बंाग्ला भाषा में हुई थी। यह बांग्ला
भाषा के कवियों से बहुत प्रभावित थे। निराला का बचपन गढ़कोला और महिषादल दोनों जगह पर
व्यतीत हुआ। जिसके कारण इनके व्यक्तित्व पर दोनों जगहों का प्रभाव पड़ा। सन् 1918 में
देश में फैली महामारी के प्रकोप इनके परिवार पर कहर बन कर टूट पड़ा। इस महामारी ने इनके
परिवार से पिता, चाचा, भाई, भाभी, पत्नी, और पुत्री को निगल लिया। जब इनकी पत्नी की
मुत्यु हुई तब निराला महिषादल में थे। 23 वर्षीय निराला चाचा के चार पुत्रों तथा अपने
पुत्र के पालन पोषण का भार आ गया। निराला ने
अपने पुत्र को डलमऊनाना-नानी के पास छोड़ कर भतीजों के साथ बंगाल चले गये। निराला का
पूरा जीवन संघर्ष में बीता। निराला के शब्दों में -सोलह सत्रह साल की उम्र में भाग्य
में जो विपर्यय शुरू हुआ वह आज तक रहा। लेकिन मुझे इतना ही हर्ष है कि जीवन के उसी
समय में मै जीवन के पीछे दौड़ा, जीव के पीछे नहीं।
