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July to September 2026 Article ID: NSS9961 Impact Factor:8.05 Cite Score:18 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
अनुसूचित जाति क्षेत्रों में महिला उद्यमिता विकास एवं जागरूकता का मूल्यांकन (छिंदवाड़ा जिले के विशेष संदर्भ में)
डॉ. मीना पाराशर
सहायक प्राध्यापक (वाणिज्य) श्री सत्य सांई महिला महाविद्यालय, भोपाल (म.प्र.)निक्की अहिरवार
शोधार्थी (वाणिज्य ) बरकतुल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल (म.प्र.)
शोध सारांश- वास्तव में मूल्यांकन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है न कि आवाधिक। यह
मूल्य निर्धारण अथवा उपलब्धियों को जानने में सहायक होता है। यह उद्देंश्यों को तय
करने, संप्राप्ति की जाँच, विसंगतियों में सुधार की भूमिका निभाता है।
साथ ही समाज को (योजना) के ढाँचे, समझने, जानने,
उपयोग,
लाभ लेने के लिए उत्तरदायित्व को भी बताता है।
शोध कार्य में आपेक्षित सूचनाओं में विभेदीकरण,
वर्गीकरण करने हेतु मापन का भी सहारा लिया है।
मूल्यांकन एवं मूल्य निर्धारण का घनिष्ठ संबंध है। मूल्य निर्धारण का अर्थ है, वे प्रक्रियायें और सामग्री जो संप्राप्तियों
को मापने हेतु व्यवहार में लायी जाती हैं,
अथवा संक्षेप में कह सकते हैं, कि किये गये कार्य को समंक देना। इस प्रकार
मूल्यांकन में मूल्य निर्धारण और मापन सम्मिलित होते हैं। यह मूल्य निर्धारण और
मापन से अधिक विस्तृत एवं समावेशी क्रिया है। राज्य सरकार की प्रत्येक योजना उपयोगी और
महत्वपूर्ण है। लेकिन यह भी सत्य है कि अध्ययन क्षेत्र में अनुसूचित जाति की
महिलाओं के आर्थिक विकास (प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष) से संबंधित अनेक योजनायें
संचालित है। जिन सबका मूल्यांकन करना अत्यंत कठिन है। वहीं छिंदवाड़ा जिले की
तहसीलों में से प्रमुख तहसीलों के 10-10 गाँवों का सर्वेक्षण कर विभिन्न योजनाओं को
मूल्यांकित किया है।
शब्द
कुंजी-आर्थिक
विकास, उद्यमिता जागरूकता, शासकीय
योजनायें, मूल्यांकन।
