• July to September 2026 Article ID: NSS9965 Impact Factor:8.05 Cite Score:17 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    राजनांदगांव के सुदूर अंचल में प्रचलित परंपरागत उपचार पद्धति एक ऐतिहासिक अनुशीलन

      डॉ. रामरतन साहू
        सह. प्राध्यापक (इतिहास) सी. व्ही. रमन विश्वविद्यालय, कोटा बिलासपुर (छ.ग.)
      दिव्या तिवारी
        शोधार्थी (इतिहास) सी. व्ही. रमन कोटा, बिलासपुर (छ.ग.)

शोध सारांश-  छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले, विशेषकर इसके सुदूर वनांचल, मोहला, मानपुर, अंबागढ़ चैकी, डोंगरगांव जैसे क्षेत्रों में शताब्दियों से एक समृद्ध, जनजातीय ज्ञान-परंपरा पर आधारित उपचार पद्धति प्रचलित रही है। बैगा, गुनिया एवं परंपरागत वैद्यों द्वारा संचालित यह चिकित्सा-प्रणाली जड़ी-बूटी-आधारित औषधि-निर्माण, झाड़-फूंक तथा तंत्र-मंत्र के समन्वय पर आधारित है, तथा यह ज्ञान पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक परंपरा एवं व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से हस्तांतरित होता रहा है। यह शोध पत्र राजनांदगांव अंचल की इस परंपरागत उपचार पद्धति के ऐतिहासिक विकास, इसके प्रमुख बैगा, गुनिया, देवार, इत्यादि द्वारा उपचार-विधियों, डोंगरगांव के महादेव डोंगरी जैसे प्रतिनिधि औषधीय केंद्रों, तथा वर्तमान में इस ज्ञान-परंपरा के संरक्षण हेतु किए जा रहे शासकीय प्रयासों का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है।