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July to September 2025 Article ID: NSS9966 Impact Factor:8.05 Cite Score:15 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
बिलासपुर अंचल में शैव मत:एक ऐतिहासिक-सांस्कृतिक अध्ययन
रमेश बाबू गुप्ता
एम. ए. (इतिहास) सी. व्ही. रमन विश्वविद्यालय, कोटा, बिलासपुर (छ.ग.)
शोध सारांश- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर अंचल में शैव मत की उपस्थिति
अत्यंत प्राचीन, सुदृढ़ एवं निरंतर रही है। रतनपुर के कलचुरि शासकों, जिन्होंने लगभग
नौ शताब्दियों तक इस अंचल पर शासन किया, ने शैव धर्म को विशेष राजाश्रय प्रदान किया,
जिसके फलस्वरूप बिलासपुर जिले में रत्नेश्वर महादेव (रतनपुर), पातालेश्वर-केदारेश्वर
महादेव (मल्हार), बांकेश्वर (तुमान), तथा गनियारी एवं किरारी गोढ़ी के शिव मंदिरों सहित
अनेक शैव स्थलों का निर्माण हुआ। यह परंपरा कलचुरि-युग तक सीमित न रहकर, 18वीं शताब्दी
के मराठा-कालीन कपिसदा शिव मंदिर जैसे उदाहरणों के माध्यम से आधुनिक काल तक निरंतरता
में बनी रही।
