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October to December 2024 Article ID: NSS9969 Impact Factor:8.05 Cite Score:41 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9969 View PDf
उदयपुर के आधुनिकीकरण में पर्यटन की भूमिका: सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक विरासत के संदर्भ में एक अध्ययन
मोनिका चौधरी
शोधार्थी, भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)डॉ. नरेंद्र सिंह राणावत
सहायक आचार्य (इतिहास) भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)
शोध सारांश - मेवाड़ की राजधानी के रूप में विकसित उदयपुर शहर की स्थापना सन 1559
ईस्वी में महाराणा उदय सिंह द्वारा की गई थी यह स्थल जिलों राजमहलों पौराणिक
मंदिरों राजा महाराजा की छतरियां जैसे अनेक सांस्कृतिक स्थलों से समृद्ध रहा है
यही विरासत आगे चलकर पर्यटन का आधार स्तंभ बनी आज पर्यटन के कारण ही उदयपुर ने
अपना नाम राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किया है परिणाम
स्वरुप परिवहन आवास हस्तशिल्प बाजार सेवा तथा स्थानीय रोजगार के क्षेत्र को
विस्तार मिला प्रस्तुत शोध पत्र में पर्यटन और आधुनिकीकरण के अंतर संबंध को
सांस्कृतिक व ऐतिहासिक विरासत के संदर्भ में विश्लेषित करने का प्रयास किया गया है
इस अध्ययन में उदयपुर की जेलों महलों उद्यानों सहित चावंड गोगुंदा कानोड़ बदला
भिंडर तथा बथड बथड पाठक जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर भी प्रकाश डाला गया है इस अध्ययन
से यह स्पष्ट होता है कि पर्यटन के कारण ही हमारी विरासत आर्थिक व सामाजिक
उपयोगिता से जोड़ सखी इस ऐतिहासिक विरासत नहीं आज के उदयपुर को सांस्कृतिक पहचान
दिलाई इसके साथ ही विरासत संरक्षण की अपेक्षा ए नियोजित पर्यटन तथा इसके
व्यवसायीकरण की चुनौतियां भी सामने आई अतः उदयपुर के आधुनिकीकरण के लिए पर्यटन के
विकास और ऐतिहासिक विरासतों के संरक्षण में संतुलन अत्यावश्यक है।
शब्द कुंजी-उदयपुर मेवाड़ आधुनिकीकरण
पर्यटन ऐतिहासिक विरासत सांस्कृतिक विरासत।
