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July to September 2026 Article ID: NSS9971 Impact Factor:8.05 Cite Score:8 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
वैश्वीकरण का सतनामी समाज की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर प्रभाव (कसडोल विकासखंड के ग्राम –पिसीद के सतनामी समाज के विशेष संदर्भ में)
ओजस्विनी सोनवानी
समाजशास्त्र एवं समाजकार्य अध्ययनशाला, पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छ.ग.)प्रो. हेमलता बोरकर वासनिक
समाजशास्त्र एवं समाजकार्य अध्ययनशाला, पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छ.ग.)
शोध सारांश- वैश्वीकरण का अर्थ होता है, विश्व के विभिन्न देशों का
आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक रूप से एक दूसरे के साथ संबंध स्थापित
करना। वैश्वीकरण की प्रक्रिया से देश में आर्थिक तथा सामाजिक प्रगति होती है।
छत्तीसगढ़
के प्रमुख संतों में बाबा गुरु घासीदास जी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है
जिन्होंने सतनाम पंथ की स्थापना की है इन्होंने समाज में व्याप्त बुराइयां जैसे
छुआछूत, जातिवाद के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने अपने उपदेशों में सत्य, अहिंसा और
सामाजिक समानता का संदेश दिया। इस पंथ का अनुसरण करने वाले लोग सतनामी कहलाए।
प्रस्तुत
शोध अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य वैश्वीकरण के कारण पर्यावरण एवं सतनामी समाज के
लोगों के आर्थिक स्थिति पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना है। शोध में
गैरसहभागी मध्यकालिक अवलोकन विधि का प्रयोग किया गया है, यह अध्ययन अवलोकनात्मक
तथा वर्णनात्मक प्रकार का अध्ययन है।
मनुष्य
जिस वातावरण में रहता है ,उसे पर्यावरण कहते हैं ।मनुष्य चारों ओर का परिवार हम
उसके शारीरिक सामाजिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है वैश्वीकरण से
भले ही आर्थिक रूप से उन्नति हुई है, लेकिन इससे सतनामी समाज के सामाजिक पर्यावरण
पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। वैश्वीकरण से पर्यावरणीय असंतुलन पर्यावरण
प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में अत्यधिक वृद्धि हुई है सतनामी समाज जो
प्रकृति के साथ जीवन जीने में अपना विश्वास रखते हैं वह वैश्वीकरण के दुष्प्रभाव
से बहुत ही प्रभावित हुए हैं।
शब्द कुंजी-वैश्वीकरण, सतनामी
समाज, पर्यावरण, आर्थिक विकास।
