• July to September 2026 Article ID: NSS9977 Impact Factor:8.05 Cite Score:78 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf

    पंचायती राज में जनजातीय महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण

      डॉ. अबधेश कुमार निरंजन
        सहायक प्राध्यापक (इतिहास) विजया राजे शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मुरार, ग्वालियर (म.प्र.)

शोध सारांश- यह शोध-पत्र भारत में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं, विशेष रूप से जनजातीय महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी, प्रतिनिधित्व एवं सशक्तिकरण का समग्र अध्ययन प्रस्तुत करता है। पंचायती राज व्यवस्था भारत में स्थानीय स्वशासन को संस्थागत एवं संवैधानिक आधार प्रदान करने वाली एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था है, जिसका प्रमुख उद्देश्य सत्ता के विकेंद्रीकरण, जनभागीदारी तथा स्थानीय स्तर पर निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया को सुदृढ़ करना है। 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किए जाने के पश्चात स्थानीय शासन में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए एक महत्वपूर्ण आधार निर्मित हुआ।

            इस अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं में जनजातीय महिलाओं की भागीदारी की प्रकृति, स्तर एवं प्रभाव का विश्लेषण करना तथा स्थानीय शासन की निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में उनकी वास्तविक एवं प्रभावी भूमिका का मूल्यांकन करना है। अध्ययन के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया गया है कि जनजातीय महिलाओं का निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में स्थानीय शासन में प्रवेश किस प्रकार उनके व्यक्तिगत, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक सशक्तिकरण को प्रभावित करता है। साथ ही, यह अध्ययन उन प्रमुख चुनौतियों एवं अवसरों की पहचान करता है जो जनजातीय महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को प्रभावित करते हैं।

शब्द कुंजी-जनजातीय महिलाओं, सशक्तिकरण, पंचायती राज ।