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July to September 2026 Article ID: NSS9981 Impact Factor:8.05 Cite Score:24 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
सामाजिक संस्थाओं में परिवर्तन के नये स्वरूपो का समाजशास्त्रीय अध्ययन (परिवार, विवाह, जाति के विशेष संदर्भ में )
डॉ. पूजा तिवारी
प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष (समाजशास्त्र) शासकीय महाविद्यालय, बिछुआ, जिला -छिंदवाडा (म.प्र.)
शोध सारांश- यह शोध पत्र समकालीन
भारतीय समाज में बुनियादी सामाजिक संस्थाओं जैसे परिवार ,विवाह और जाति में
परिलक्षित परिवर्तनों का विश्लेषण करता हैं ,इन सभी संस्थाओं में गुणात्मक और
सरंचनात्मक परिवर्तन दिखाई देते हैं जिसके पीछे अनेक कारण उत्तरदायी होतें हैं
भूमंडलीकरण, उदारीकरण,
तकनीकीकरण,
व्यक्तिगत
स्वतन्त्रता आदि के बढ़ते प्रभाव ने पारम्परिक सामाजिक सरंचनाओं को गहराई से
प्रभावित किया हैं।
एक और
जहाँ संस्थाएं अपने पुराने स्वरुप को त्याग कर आधुनिकता और उत्तर आधुनिकता के
सांचे में ढल रही हैं वही दूसरी ओर परम्परा और आधुनिकता का एक जटिल अन्तर्सम्बन्ध
भी देखने को मिलता हैं।
शब्द कुंजी-सामजिक संस्था
,परिवर्तन ,परिवार ,विवाह ,जाति ,आधुनिकता ,वैश्वीकरण।
