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July to September 2026 Article ID: NSS9994 Impact Factor:8.05 Cite Score:6 Download: 0 DOI: https://doi.org/ View PDf
बिलासपुर जिले में फसल प्रतिरूप का स्थानिक-कालिक परिवर्तन एवं कृषि विकास: एक भौगोलिक अध्ययन
डॉ. रत्नेश कुमार खन्ना
सहायक प्राध्यापक (भूगोल) डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, बिलासपुर (छ.ग.)कु. संस्कृति शास्त्री
शोधार्थी (भूगोल) डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, बिलासपुर (छ.ग.)
शोध सारांश- कृषि किसी भी क्षेत्र की
अर्थव्यवस्था, आजीविका तथा ग्रामीण सामाजिक
संरचना का एक महत्वपूर्ण आधार है और किसी क्षेत्र के कृषि विकास की वास्तविक
स्थिति को समझने के लिए वहाँ के फसल प्रतिरूप, फसल
विविधीकरण, फसल गहनता, सिंचाई, कृषि तकनीक, मशीनीकरण
तथा बाजार व्यवस्था में होने वाले परिवर्तन का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। प्रस्तुत
शोध-पत्र मेंबिलासपुर जिले में फसल प्रतिरूप के स्थानिक-कालिक परिवर्तन एवं कृषि
विकासका भौगोलिक दृष्टिकोण से विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में प्राथमिक एवं
द्वितीयक दोनों प्रकार के आँकड़ों का उपयोग किया गया है। प्राथमिक आँकड़ों के
संकलन हेतु वर्ष 2020 की प्रशासनिक संरचना को आधार मानते
हुए जिले की 11 चयनित तहसीलों से एक-एक ग्राम का
चयन किया गया तथा प्रत्येक चयनित ग्राम से 50 कृषक
परिवारों का सर्वेक्षण किया गया। इस प्रकार कुल 11 ग्रामों
के 550 कृषक परिवारों को अध्ययन की
प्राथमिक इकाई बनाया गया। चयनित ग्रामों में अमतरा, चुराघाट, अकोला, अमली, अचानकपुर, उमरमरा, अकलतरी, सीपत, अमेरी, बोडसरा
एवं बेलगहना शामिल हैं। अध्ययन से प्राप्त निष्कर्षों से स्पष्ट होता है कि
बिलासपुर जिले का फसल प्रतिरूप पूर्णतः स्थिर नहीं है, बल्कि
सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, उन्नत बीज, कृषि
मशीनीकरण, बाजार संपर्क, कृषि ऋण, कृषकों की
आय तथा तकनीकी जानकारी में परिवर्तन के साथ इसमें निरंतर बदलाव आया है। धान अभी भी
जिले की प्रमुख फसल है, किंतु इसके साथ गेहूँ, चना, मटर, तिलहन एवं
अन्य फसलों के क्षेत्र में वृद्धि तथा फसल विविधीकरण की प्रवृत्ति दिखाई देती है।
अध्ययन यह भी दर्शाता है कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई, मशीनीकरण
तथा बाजार सुविधाएँ अपेक्षाकृत बेहतर हैं, वहाँ फसल
गहनता और विविधीकरण का स्तर अधिक है। इसके विपरीत सीमित सिंचाई एवं कमजोर बाजार
संपर्क वाले क्षेत्रों में कृषि अभी भी अपेक्षाकृत पारंपरिक स्वरूप में दिखाई देती
है। अतः जिले में संतुलित कृषि विकास के लिए सिंचाई विस्तार, फसल विविधीकरण, कृषि
तकनीकी प्रसार, संस्थागत ऋण, भंडारण, प्रसंस्करण
तथा बाजार संपर्क को मजबूत करना आवश्यक है।
शब्द कुंजी-फसल प्रतिरूप, स्थानिक-कालिक परिवर्तन, कृषि विकास, फसल विविधीकरण, फसल गहनता, सिंचाई, मशीनीकरण, बिलासपुर।
